घाटमपुर में घोटाले का एक मामला सामने आया, धर्मकांटा की फर्जी रसीद लगा फर्म को 4.90 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। और इसके अलावा टिकवांपुर में 3.36 लाख व सजेती में 80 हजार रुपये के बाउचर भी नहीं मिले हैं।
इसके अलावा कुल मिलाकर 1.32 करोड़ का घपला किया गया है। ऐसे में सीडीओ ने 11 सचिवों का वेतन रोक दिया है। ग्राम पंचायतों में चारा, भूसा खरीद के 1.32 करोड़ रुपये के कागजात दो साल में भी नहीं दे पाने पर सीडीओ दीक्षा जैन ने 11 पंचायत सचिवों का वेतन भी रोका है।
और 19 ग्राम पंचायतों के आडिट के दौरान पूरा मामला सामने आने के बाद से अब तक पशुपालन विभाग इन सचिवों से कागजात मिलने की बाट जोह रहा। अब सचिवों को तभी वेतन दिया जाएगा, जब वे बिल-बाउचर खोजकर संयक्त रूप से जमा कराएंगे।
इसके अतिरिक्त कागजात नहीं देने पर पूरी धनराशि सचिवों को जमा करनी होगी। इसके लिए उन्हें एक हफ्ते भर का समय दिया गया है। इसके बाद और कड़ी कार्रवाई भी होगी। वर्ष 2019 से 2021 तक के आडिट में 19 ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिवों ने गड़बड़झाला किया।
इसके अतिरिक्त बिधनू, भीतरगांव, बिल्हौर, शिवराजपुर, सरसौल, घाटमपुर, पतारा व ककवन ब्लाक के गोवंशी आश्रय स्थलों में चारा खरीद को लेकर बंदरबांट भी हुआ। भुगतान के लिए लगाए बिलों में स्कूटी, बाइक, कार व आटो तक के नंबर डाले।
और लगभग 42 लाख रुपये का भुगतान गोसेवकों को किया गया। इसमें बिधनू ब्लाक की कठारा ग्राम पंचायत में भूसा, चूनी-चोकर व चरी खरीदने के लिए 33.53 लाख रुपये खर्च किए गए पर बिल नहीं दिया गया। प्रधान व सचिव बिना किसी काम के खर्च किए 1.60 लाख रुपये का हिसाब नहीं दे सके।
ये भी बता दें कि घाटमपुर में 11.67 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। धर्मकांटा की फर्जी रसीद लगा फर्म को 4.90 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।
टिकवांपुर में 3.36 लाख व सजेती में 80 हजार रुपये के बाउचर नहीं मिले। दो वर्ष से आडिट रिपोर्ट पर पशुपालन विभाग भी चुप रहा। शासन के आदेश पर सीडीओ ने संज्ञान लेकर सभी को अंतिम नोटिस देकर कागजात भी मांगे।
अब इसमें आठ सचिवों ने कागजात जमा किए पर 11 कोई कागज नहीं दे पाए। सीडीओ दीक्षा जैन ने बताया कि अरंझामी, मोहिउद्दीनपुर, चौबिगही शिकोहाबाद, रामपुर सरसौल, टिकवांपुर, मैधरी, पतारा, कटरी, कठारा, महाराजपुर व गांगूपुर के 11 सचिवों का वेतन अब मुख्य रूप से रोका गया है।
सचिवों के वेतन रोकने के साथ ही उन्हें अंतिम अवसर देकर बिल-बाउचर मांगे गए हैं। इसके बाद संबंधित से धनराशि भी वसूली की जाएगी।