न्यूज़लिंक हिंदी, कानपुर। सीएसए के मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार महानगर में शिमला और जम्मू जैसे पर्वतीय क्षेत्रों से भी कम तापमान दर्ज हुआ। डॉ. पांडेय के अनुसार शिमला, जम्मू-कश्मीर जैसे पर्वतीय क्षेत्र तलहटी में बसे होने की वजह से बर्फीली हवाएं वहां आसानी से नहीं पहुंच पाती हैं। वहीं मैदानी क्षेत्रों में इन हवाओं का असर ज्यादा पड़ता है।
यही कारण है कि मैदानी क्षेत्रों में तापमान ज्यादा तेजी से लुढ़कता जा रहा है। महानगर में भी पिछले एक सप्ताह में न्यूनतम तापमान में चार डिग्री से ज्यादा की कमी आई है। अब दिन में हल्के बादल होने की वजह से अधिकतम तापमान भी अब नीचे जाने लगा है।
अगले पांच दिनों में यह और भी नीचे जा सकता है। इस बीच हवा में अधिकतम नमी की मात्रा 94 और न्यूनतम मात्रा 32 प्रतिशत रही। इसके अलावा महानगर में प्रदूषण की औसत मात्रा 147 एक्यूआई रिकार्ड की गई है।
हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक के रोगी हुए दोगुना
हार्ट अटैक रोगी (कार्डियोलॉजी)
– पहले प्रतिदिन औसत 25 रोगी।
– ठंड बढ़ने के बाद औसत 52 रोगी।
ब्रेन अटैक रोगी (हैलट इमरजेंसी)
– पहले प्रतिदिन औसत पांच रोगी।
– ठंड बढ़ने के बाद औसत 11 रोगी।
बरतें सावधानी
- गर्म कमरे से अचानक बाहर सर्दी में न निकलें।
- बीपी बढ़ा हुआ तो दवा की खुराक दुरुस्त कराएं।
- हल्की गर्मी लगे तब भी एक जैकेट पहने रहें।
- खानपान में एहतियात रखें, देर रात की पार्टियों से बचें।
जाड़े में वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। ठंड की बीमारियां भी बढ़ने लगती हैं। ब्लडप्रेशर के रोगी, उम्र दराज लोग खासतौर पर एहतियात बरतें। बीपी बढ़ने से खून का थक्का जम जाता है जिससे ब्रेन अटैक या हार्ट अटैक का खतरा रहता है। संक्रमण से कोल्ड डायरिया हो सकता है। ठंड से बच्चे, बुजुर्ग और पुराने रोगी विशेष रूप से बचाव करें। -डॉ. आलोक रंजन, सीएमओ कानपुर नगर

