न्यूज़लिंक हिंदी, मथुरा। देश विदेश में हिन्दू महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु के लिए 01 नवंबर को करवाचौथ का व्रत रखेंगी। जिसे लेकर नवविवाहिताओं में खासा उत्साह है। बाजारों में खरीदारी के लिए रौनक बढ़ रही है। करवाचौथ का व्रत बुधवार को देश भर में मनाया जाएगा। चांद निकलने पर जब सुहागिनें उसे अर्घ्य देंगी तो यूपी में एक ऐसा भी गांव है जहां उस वक्त मायूसी छाई रहेगी।
यहां हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कस्बा सुरीर की, यहां सुहाग की सलामती के लिए करवाचौथ के व्रत से परहेज रखने को रूढ़िवादी परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। दरअसल सुरीर में सती के श्राप का भय महिलाओं के मन मस्तिष्क पर इस कदर छाया हुआ है कि महिलाएं करवाचौथ का त्यौहार नहीं मानती हैं। बल्कि इस दिन यहां की महिलाएं श्रंगार भी नहीं करतीं हैं।
कस्बा सुरीर के बघा मोहल्ले में सैकड़ों परिवारों में सती के श्राप के डर से करवाचौथ और अहोई अष्ठमी का त्योहार मनाने पर बंदिश लगी हुई है। करवाचौथ का व्रत न रख पाने की कसक नवविवाहितों को अक्सर कचोटती रहती है।यहां की रहने वाली रेखा देवी कहती हैं कि मन में तमन्ना थी कि शादी के बाद पहले करवाचौथ पर वह निर्जला व्रत एवं सोलह श्रंगार कर अपने चांद का दीदार करेंगी। लेकिन ससुराल में आकर पता चला कि सती के श्राप की बंदिश के चलते वह ऐसा नहीं कर पाएगी।
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वहीं विवाहिता पूजा व पूनम बताती हैं कि करवाचौथ पर सुहाग की सलामती को निर्जला व्रत रखने को मन में बहुत उमंग थी, शादी के बाद ससुराल में आकर करवाचौथ से परहेज की बात सुनी तो वह मन मसोस कर रह गई। महिला प्रीति देवी का कहना है कि सती के श्राप की परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। सभी इसका पीढ़ी दर पीढ़ी निर्वहन कर रहे हैं। किसी में इस बंदिश को तोड़ने की हिम्मत नहीं है।
सती का श्राप कहें या संयोग, ये है पूरी कहानी..
बुजुर्गों की मानें तो सैकड़ों वर्ष पहले नौहझील के गांव राम नगला निवासी एक ब्राह्मण युवक अपनी पत्नी के साथ ससुराल से घर लौट रहा था। रास्ते में सुरीर के इसी बघा मोहल्ले से होकर निकलते समय भैंसा बुग्गी को लेकर यहां के लोगों से विवाद हो गया। इस झगड़े में ब्राह्मण युवक की मौत हो गई। अपनी आंखों के सामने पति की मौत देख मृतक ब्राह्मण युवक की पत्नी कुपित हो गई। बिलखती हुई ब्राह्मण की पत्नी ने इस मोहल्ले के लोगों को श्राप देकर अपने प्राण त्याग दिए।
अब इसे सती का श्राप कहें या फिर संयोग,, अगली करवा चौथ पर मोहल्ले पर कहर टूटा, यहां के दर्जनों युवाओं की मौत हो गई। जिन जिन महिलाओं ने व्रत रखा, वे सभी विधवा हो गईं। बुजुर्गों ने इसे सती का श्राप मानते हुए क्षमा याचना की, और मोहल्ले में सती का मंदिर बनवा कर पूजा अर्चना शुरू की। इसके बाद करवा चौथ और अहोई अष्टमी के त्योहार पर सती के श्राप के डर से कोई महिला व्रत नहीं रखती है। त्योहार मनाना तो दूर इस मोहल्ले की महिलाएं पूरा श्रंगार तक नहीं करतीं हैं।
रामनगला के ब्राह्मण नहीं पीते हैं सुरीर का पानी..
कस्बा सुरीर के बघा मोहल्ले में अब सती की पूजा देवी स्वरूप में होती है। यहां बने मंदिर में महिलाएं विवाह एवं त्यौहारों पर सती की पूजा करते हैं। नौहझील के गांव राम नगला के ब्राह्मण आज भी सुरीर के इस मोहल्ले का पानी तक नहीं पीते हैं। लोग आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।

