न्यूज़लिंक हिंदी। दिवाली पर मुख्य रूप से लक्ष्मी पूजा अमावस्या की तारीख और शाम एवं रात में प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद से लेकर देर रात तक करने का विधान भी होता है।
ऐसे में दिवाली 31 अक्टूबर को अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और निशिताकाल मुहुर्त में मनाना बेहद शुभ और शास्त्र संवत पूर्ण रूप से सही होगा, 1 नवंबर को शाम में अमावस्या की तिथि समाप्त हो जाएगी।
ऐसे में जो लोग 1 नवंबर को दिवाली मनाएंगे, वो गलत और अशुभ भी माना जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि पर दिवाली की शाम/रात लक्ष्मी पूजा भी की जाती है। यह शाम/रात में प्रदोष काल के दौरान यानि सूर्यास्त के बाद लक्ष्मी पूजन करने का मुख्य विधान है।
28 अक्टूबर को गोवत्स द्वादशी, वसुबारस, 29 अक्टूबर को धनतेरस, 30 अक्टूबर काली चौदस, हनुमान पूजा, 31 अक्टूबर नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), काली पूजा, 01 नवंबर दिवाली (लक्ष्मी पूजा) , 02 नवंबर गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, 03 नवंबर भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त की पूजा की जाएगी।

