कानपूर में सीपीआर प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। जानिए कैसे सीपीआर जान बचाने में कैसे मददगार हो सकता है और आप भी सीपीआर सीखने के लिए कहां और कैसे रजिस्टर कर सकते हैं।
सीपीआरन का प्रशिक्षण हासिल करने का उत्साह शहरवासियों में दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। दूसरों की जान बचाने की पहल में चलाए जा रहे अभियान से जुड़कर मॉर्निंग वॉकर्स, सोसाइटी, अपार्टमेंट, बाजार और समितियां जान बचाने का हुनर सीखने में ही आतुर हैं।
कार्डियक अरेस्ट के मरीज को नवजीवन प्रदान करने के लिए सीपीआर यानि कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन का प्रशिक्षण हासिल कर रहा है। काकादेव स्थित रतन कृति अपार्टमेंट में सीपीआर कार्यशाला का आयोजन किया।
और इसमें बड़ी संख्या में अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने सीपीआर का जीवन के लिए महत्व समझा और डमी पर विशेषज्ञों की देखरेख में जीवन बचाने का हुनर भी सीखा।
रविवार को संजय वन के मुख्य द्वार पर सुबह छह बजे और गुरुद्वारा बाबा नामदेव किदवई नगर में सीपीआर कार्यशाला का आयोजन होगा।
आमतौर पर रक्त में मस्तिष्क और अन्य अंगों को कुछ मिनटों तक जीवित रखने के लिए पर्याप्त आक्सीजन होती है, लेकिन जब तक कोई व्यक्ति सीपीआर नहीं करता है, तब तक यह प्रसारित नहीं होती है।
सीपीआर अचानक हुए हादसे का शिकार, करेंट लगने, डूबने, हृदय घात और अन्य गंभीर स्थितियों में सीपीआर संजीवनी के रूप में काम करता है।
और यह बंद हुए दिल को आर्टिफिशियल रूप से सांस प्रदान करने का सबसे उपयोगी क्रिया है। अपार्टमेंट में रहने वालों ने बारी-बारी सीपीआर का महत्व समझा और मन में उठने वाले प्रश्नों का उत्तर विशेषज्ञों से जाना।
इसके बाद डा. एके पाहूजा, मनोज आडवाणी, दिलीप बजाज, पूरन, रवि, रतन रजानी, डा. एके त्रिपाठी, रागिनी, रंजना, मनीषा, सीमा, गुरदीप, अर्चना सहित अपार्टमेंट में रहने वालों ने डमी पर सीपीआर देने का प्रशिक्षण भी हासिल किया।