आज जानिए प्यार में दीवाने औरंगजेब की, अधूरी लव स्टोरी। मुगल बादशाह औरंगजेब को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है, लेकिन आज हम आपको उसी बादशाह, जो काफी बेरुखे मिजाज के बताए जाते हैं।
उनकी प्रेम कहानी के बारे में बतायेगे। इतिहासकारों के मुताबिक यूं तो औरंगजेब ने तीन शादियां की थीं, लेकिन उनका पहला प्यार इन तीनों पत्नियों में से एक भी नहीं था। बल्कि उनका पहला प्यार कोई और महिला थी।
और औरंगजेब को पहला प्यार तब हुआ था, जब वह कोई बादशाह नहीं थे। और अपनी जवानी के दिनों में खुद के लिए संघर्ष कर रहे थे। एक तरफ जिंदगी से संघर्ष और दूसरी ओर उन्हें एक ऐसी महिला से प्यार हुआ, जो उन्हें कभी नहीं मिलीं।
और उसने औरंगजेब को एक-दो नहीं बल्कि कई बार ठुकराया, लेकिन बादशाह औरंगजेब फिर भी अपने पहले प्यार को कभी नहीं भूल पाए।
इसके साथ ही बादशाह औरंगजेब का पहली बार एक तवायफ पर दिल आया था, जिसका नाम हीराबाई जैनाबादी था। और हीरा बाई ईसाई धर्म को मानती थी। ये भी कहा जाता है कि हीराबाई बेहद खूबसूरत थीं और उनकी आवाज दिल को छू लेने वाली थी। उनके नृत्य का हर कोई दीवाना था।
और उनकी अदाएं ऐसी थीं, जो लोगों के दिलों को घायल कर देती थीं। और हीरा बाई औरंगाबाद में उनके मौसा के हरम में रहती थी। जब उन्हें हीरा बाई से प्यार हुआ, तो वह जवान थे।
और उनकी बहादुरी मशहूर थी। औरंगजेब के पिता शाहजहां के सबसे प्रिय उनके बड़े बेटे दारा शिकोह थे। और औरंगजेब दिल्ली की राजनीति से तो थक ही गए थे, साथ ही अपने पिता की बेरुखी से भी वह टूट चुके थे।
और इसके बाद जब औरंगजेब दोबारा दक्खन भेजे गए तो वह बिना मन से ही गए। और उन पर लिखी एक किताब में इस दौरान का जिक्र किया गया है।
ये भी बता दें कि “दो सुल्तान, दो बादशाह और उनका प्रणय परिवेश” हेरम्ब चतुर्वेदी ने अपनी किताब में दक्कन पहुंचने और उनके पहले प्यार का भी जिक्र भी किया है। और दक्कन औरंगजेब अजीब मन से पहुंचे थे।
औरंगजेब अपनी मौसा-मौसी के काफी करीब थे और दोनों से उनके अच्छे ताल्लुकात थे। वह अपनी मौसी से मिलने के लिए जैनाबाद, बुरहानपुर गए।
और वहां वह एक दिन घूमते-घूमते जैनाबाद-बुरहानपुर के हिरन उद्यान में पहुंच गए, यहीं उनकी पहली मुलाकात उनके पहले प्यार से हुई। वहां उन्होंने हीराबाई को पहली बार देखा। उनका खूबसूरत चेहरा, मनमोहक संगीत और दिलकश अदाएं।
वह जैनाबादी हरम की बाकी महिलाओं के साथ वहां आई। आम के पेड़ से एक आम तोड़ा, फिर दिलकश अंदाज से गाना भी गाया। और उनके इस अंदाज को देख औरंगजेब उनकी ओर खिंचते चले गए।
इतना ही नहीं औरंगजेब हीराबाई तवायफ के इस कदर दीवाने हो गए थे कि उनका दिन का चैन और रातों की नीदें उड़ गई थीं। और आलम ये था कि औरंगजेब जब तक उसे न देख लें, तब तक उन्हें नींद नहीं आती थी।
और औरंगजेब जैनाबादी की इश्क में पूरी तरह डूब चुके थे। वह औरंगजेब के मौसा के दरबार में मनोरंजन करती थी, लेकिन जब औरंगजेब ने हीराबाई को देखा और उनके दीवाने हो गए तो हीराबाई को उन्हीं के पास छोड़ दिया था।
और हीराबाई एक अल्हड़ उम्र की तवायफ थी। औरंगजेब को जब भी अपने काम से फुरसत मिलती थी। वह कहीं और नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ हीराबाई के साथ ही वक्त गुजारते थे। हीराबाई जो कहती औरंगजेब वही करते थे।
और एक दिन उसने औरंगजेब को प्यार की कसम देकर मदिरा का प्याला उनके हाथों में दिया और पीने के लिए कहा। और फिर औरंगजेब जितना सख्त होकर बोलते। वह उतनी अदाएं और प्यार भरे अंदाज से उन्हें पीने के लिए बोलती।
इसके साथ ही हारीबाई औरंगजेब के प्यार का इम्तिहान ले रही थी, लेकिन जैसे ही औरंगजेब ने मदिरा का प्याला अपने होठों से लगाया, हीराबाई ने उसे छीनकर फेंक दिया और कहा कि मैं बस तुम्हारे प्यारा का इम्तिहान ले रही थीं।
जैसे-जैसे दिन गुजरते जा रहे थे। औरंगजेब और हीराबाई का प्यार और गहरा होता जा रहा था। उनके प्यार की जानकारी उनके पिता शाहजहां तक पहुंच गई थी।
और अब औरंगजेब हर शाम अपना खाली वक्त सिर्फ हीराबाई के साथ ही गुजारते थे, लेकिन एक दिन हीराबाई की बीमारी की वजह से मौत हो गई, जिसके बाद औरंगजेब बुरी तरह टूट गए और उन्होंने बहुत मुश्किल से खुद को संभाला।
और इस बारे में अहकाम के लेखक ने भी लिखा है। साथ ही उनके पहले प्यार के बारे में भी कई बार चर्चा भी होती है। औरंगजेब के पहले और अधूरे प्यार के किस्से कई जगह पर मिलते हैं।