पाकिस्तानी अधिकारियों का अब ये कहना है कि भारतीय नागरिक सरबजीत कौर को भारत वापस भेजने के बजाय उनके वीज़ा की अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
और फिर इससे पहले आई ख़बरों में कहा गया था कि पाकिस्तान में वीज़ा की मियाद ख़त्म होने के कारण सरबजीत को डिपोर्ट भी कर दिया जाएगा।
हालांकि, पाकिस्तान के गृह मंत्रालय से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट’ न मिलने के कारण, उन्हें वाघा बॉर्डर से वापस कर दिया गया था।
फिर इसके बाद उन्हें लाहौर के एक महिला शेल्टर में भी रखा गया। और फिर पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने ये भी कहा कि सरबजीत का कहना है कि उन्होंने इस्लाम अपना लिया है।
उधर तलाल चौधरी ने दावा किया, भारत में मुसलमानों के लिए ज़िंदगी बहुत मुश्किल है, इसलिए सरबजीत को डिपोर्ट नहीं किया जाना चाहिए।
और फिर जब उनसे सरबजीत के संभावित डिपोर्टेशन के बारे में सरकार के फ़ैसले के बारे में पूछा गया।
तो चौधरी ने कहा, मानवीय आधार पर इस मामले की सावधानी से समीक्षा भी की जा रही है। और फिर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें वापस न भेजा जाए।
इसके साथ ही चौधरी ने कहा कि सरबजीत ने औपचारिक रूप से पाकिस्तानी सरकार से अपील की थी कि उन्हें डिपोर्ट न किया जाए, क्योंकि उन्हें भारत में अपनी सुरक्षा का डर भी था।
और फिर सरबजीत ने इसी आधार पर लाहौर हाई कोर्ट में एक याचिका भी दायर की है।
और फिर आगे उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से इनपुट लेकर सरबजीत के मामले पर कुछ टिप्पणियां की हैं।
और गृह मंत्रालय इन सभी बातों पर विचार करने के बाद अंतिम फ़ैसला भी लेगा।इसके अलावा जासूसी के शक में सरबजीत कौर की जांच की ख़बरों पर चौधरी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की तरफ़ से ऐसी जांच होती है।
और सरकार अभी उनकी अपील और उनके अल्पसंख्यक होने के स्टेटस पर ध्यान दे रही है।आगे उन्होंने कहा, वह अभी एक महिला शेल्टर में रह रही हैं।
और फिर गृह मंत्रालय सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जल्द ही फ़ैसला लेगा। फिर आगे उन्होंने आगे कहा कि फ़िलहाल, सरबजीत कौर का वीज़ा बढ़ाया भी जा सकता है, और आगे भी वीज़ा की सुविधाएं भी दी जा सकती हैं।