न्यूज़लिंक हिंदी। आज के समय में लोग जहां अपनी सेहत पर बहुत ज्यादा ही ध्यान देते हैं, क्या खाएं और क्या ना खाएं। इन बातों पर भी बहुत गौर करते हैं, लेकिन जब खाने के तेल की बात आती है, तो इसे लेकर लोग काफी कंफ्यूज भी हो जाते हैं।
आखिर खाने के लिए कौन सा तेल सही होगा, कौन सा तेल खाएं जो सेहत के लिए लाभकारी होगा। जानते हैं आयुर्वेद डॉक्टर अंकित नामदेव से। आयुर्वेद डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि तेल शब्द जो है तिल से आया है, आदिकाल में भारत में सबसे ज्यादा प्रचलित था तिल का तेल, जो कि खाने के लिए और बाह्य उपयोग लगाने के काम में आता था।
उसी से इस पदार्थ का नाम तेल पड़ा है। उत्तर भारत में तिल का प्रोडक्शन प्रचुरता से होता था, तो खाना बनाने के लिए तिल के तेल का आदिकाल से उपयोग होता था। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के तेलों का इस्तेमाल भी होता है। जहां सरसों का उत्पादन अच्छा होता है, वहां सरसों का तेल उपयोग किया जाता था।
जैसे दक्षिणी भारत में नारियल का तेल उपयोग किया जाता है, तेल का उपयोग वहां के वातावरण में डिपेंड करता है। क्षेत्र के वातावरण के हिसाब से तेल का उपयोग करना चाहिए। डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि आयुर्वेद के मता अनुसार भोजन में तिल का तेल सबसे उत्तम माना जाता है। बाह्य उपयोग के लिए सरसों का तेल उत्तम माना जाता है।
वात रोग में तिल का तेल अमृत तुल्य माना गया है, जबकि कफ रोग में सरसों का तेल अमृत तुल्य माना गया है और पित्त रोग में नारियल का तेल अमृत तुल्य है। गर्म जगह पर जैसे की भूमध्य रेखा के पास के जो क्षेत्र हैं, दक्षिण भारत का क्षेत्र उस एरिया में आमतौर पर उमस नमी और गर्मी बहुत ज्यादा होती है, तो वहां पर नारियल का तेल ज्यादा प्रयुक्त भी किया जाता है।
राजस्थान के एरिया आदि में तिल का तेल ज्यादा प्रयुक्त होता है, उत्तर भारत में हिमाचल तरफ सरसों का तेल ज्यादा उपयोग भी किया जाता है। एरिया वाइज तेल का इस्तेमाल भी किया जाता है। आयुर्वेद डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि कौन सा तेल नहीं खाना चाहिए, यह जो आर्टिफिशियल प्रॉसेस से बनाए हुए तेल होते हैं, या फिर जो पाम आयल होते हैं।

