न्यूज़लिंक हिंदी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों को इम्पलॉयर से कई तरह की सहूलियतें मिलती रहती हैं। इनमें एक सहूलियत इंटरेस्ट फ्री या रियायती ब्याज दर पर मिला लोन भी शामिल है। बैंक कर्मचारियों को मिलने वाले इसी तरह के लोन पर सुप्रीम कोर्ट की कलम अब चल गई है। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि कर्मचारियों को अपने बैंक से ब्याज मुक्त या कम ब्याज ऋण लेने पर जो भी पैसा बचता है, उस पर इनकम टैक्स लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा और इनकम टैक्स रूल और की वैधता को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने मंगलवार को ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन की याचिकाओं और विभिन्न बैंकों के कर्मचारी संघों और अधिकारी संघों द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
इन अपीलों में आयकर कानून और आयकर नियम के प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी थी। आईटी अधिनियम और इसके नियम बैंक कर्मचारियों को दिए गए ब्याज-मुक्त या कम-ब्याज ऋण के माध्यम से बचाए गए धन पर इनकम टैक्स लगाने की अनुमति देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ ने कहा बैंक कर्मचारियों को ब्याज मुक्त ऋण या रियायती ब्याज दर पर ऋण से मिलने वाला लाभ एक अनूठा लाभ है जो उन्हें प्राप्त होता है। यह एक ‘अनुलाभ’ की प्रकृति में है, और इसलिए कराधान के लिए उत्तरदायी है।
उन्होंने कहा, नियोक्ता द्वारा ब्याज मुक्त ऋण या रियायती दर पर ऋण देना निश्चित रूप से फ्रिंज बेनिफिट और अनुलाभ के रूप में योग्य होगा, जैसा कि आम बोलचाल में इसके प्राकृतिक उपयोग से समझा जाता है। पीठ का कहना था अनुलाभ ‘वेतन के बदले लाभ’ के विपरीत कर्मचारी द्वारा धारित पद से जुड़ा एक अतिरिक्त लाभ है, जो अतीत या भविष्य की सेवा के लिए एक पुरस्कार या प्रतिपूर्ति है।

