Lucknow News : निजी स्कूलों की मनमानी लगातार जारी, अभिभावकों पर जबरन थोपा जा रहा भारी-भरकम बोझ

0
44

अब नए शिक्षा सत्र में निजी स्कूलों ने प्रवेश व अन्य शुल्क में तीन से 27 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी तो कर ही दी है, फिर किताबों के साथ स्टेशनरी व काॅपियां खरीदने के नाम पर लूटा जा रहा है।

और स्कूलों की तय दुकानों पर मनमाने दामों पर किताबें, स्टेशनरी और कॉपियां दी जा रही हैं। फिर कॉपियां व स्टेशनरी न देने पर किताबें देने से मना कर दिया जाता है।

साथ ही नीलमथा निवासी प्रिंस लेनिन ने से इसी बात पर पुस्तक विक्रेता से विवाद हो गया तो मामला पीजीआई थाने तक भी पहुंच गया।

दरअसल बड़े स्कूलों की वेबसाइट पर प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेक्शन तक में प्रवेश शुल्क से लेकर वार्षिक कंपोजिट शुल्क में तीन से 27 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी भी दिख रही है।

और फिर लखनऊ पब्लिक स्कूल, गोमती नगर फीस वृद्धि के मामले में सबसे आगे हैं। फिर इनमें प्री-प्राइमरी में 18 प्रतिशत, प्राइमरी में 22 प्रतिशत, जूनियर सेक्शन में 25 प्रतिशत और सीनियर सेक्शन में 27 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ा दिया गया है।

और फिर दूसरे स्थान पर सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल, तीसरे पर डीपीएस और चौथे स्थान पर जीडी गोयनका स्कूल एवं सिटी मोन्टेसरी स्कूल हैं। इनमें अपेक्षाकृत सबसे कम फीस वृद्धि भी की गई है।

इसके साथ ही फीस निर्धारण अधिनियम-2018 के अनुसार विद्यालय अपनी फीस में पिछले वर्ष की महंगाई दर के साथ 5 प्रतिशत तक वृद्धि कर सकते हैं।

चूंकि सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अनुसार ही पिछले 12 महीनों का औसत महंगाई दर के हिसाब से ही फीस वृद्धि होनी चाहिए।

फिर यदि कोई भी स्कूल किताबों के लिए किसी एक दुकान से ही लेने के लिए बाध्य करता है, तो फिर अभिभावक उनकी लिखित शिकायत संबंधित जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक से भी कर सकते हैं।

और फिर किताबों और ड्रेस को लेकर अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बनाना अत्यंत चिंताजनक भी है।

और फिर सीमित दुकानों से ही पुस्तक खरीदने की बाध्यता प्रतिस्पर्धा को समाप्त भी कर देती है।

जिससे कीमतें भी बढ़ जाती हैं और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। यह खुली लूट है जो बिना किसी हथियार के ही की जा रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here