न्यूज़लिंक हिंदी। महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए मराठा आंदोलन खत्म करने का ऐलान हो गया है। एकनाथ शिंदे की महायुति सरकार ने मराठा आरक्षण के संबंध में मनोज जरांगे की सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है और इस संबंध में एक अध्यादेश जारी किया है। मनोज जरांगे लाखों लोगों के साथ आज मुंबई में एंट्री लेने वाले थे। इधर आधी रात को मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और मंत्री दीपक केसरकर ने मनोज जरांगे को मराठा आरक्षण के संबंध में राजपत्र सौंपा। मनोज जरांगे से मिलने खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पहुंचे।

इस दौरान उन्होंने मनोज जरांगे को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया। उसके बाद मनोज जरांगे ने आंदोलन खत्म होने का ऐलान किया। इस दौरान मौके पर आतिशबाजी हुई। जमकर नारे लगे। मनोज जरांगे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अध्यादेश को राज्य के प्रमुख के रूप में स्वीकार करके भूख हड़ताल तोड़ दी। मनोज जरांगे ने सरकारी प्रतिनिधिमंडल के जारी अध्यादेश पर वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ तीन घंटे की चर्चा की, जिसके बाद जरांगे ने आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की।
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मनोज जरांगे पाटिल की क्या थी मांग?
मनोज जरांगे ने मांग रखी थी कि अंतरावली सहित महाराष्ट्र के सभी मामले जो दर्ज हैं, उसे वापस लिया जाए। उसका सरकारी आदेश का पत्र उन्हें दिखाया जाए। आरक्षण पर फैसला आने तक मराठा समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा फ्री की जाए। इसके साथ ही सरकारी भर्ती में मराठाओ के लिए रिजर्व कोटा रखा जाए। इसके अलावा जरांगे ने अपने एक बयान में आगे कहा कि अभिलेख (नोंदि) खोजने में हमें भी मदद करनी होगी। अभिलेख मिलने पर सभी संगे-संबंधियों को प्रमाण पत्र दिया जाए. सगे-संबंधियों को लेकर अध्यादेश निकाला जाए।
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‘मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अच्छा काम किया’
वहीं सरकार की ओर से मांगों को मान लिए जाने के बाद मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जारंगे की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अच्छा काम किया है। हमारा विरोध अब खत्म हो गया है। हमारा अनुरोध स्वीकार कर लिया गया है। हम उनका पत्र स्वीकार करेंगे। वो मुख्यमंत्री के हाथ से जूस पीकर अपना अनशन समाप्त करेंगे।

