- विद्युत विभाग ओटीएस में बेहद सुस्त है मथुरा की चाल, अधिकारी लखनऊ तलब
- जनपद में विद्युत उपभोक्ताओं पर कुल 568 करोड़ का विद्युत विभाग का है बकाया
- 65 प्रतिशत छूट के बावजूद चोरी के मामलों में 7.69 प्रतिशत ने ही कराया रजिस्ट्रेशन
न्यूजलिंक हिंदी,मथुरा। विद्युत विभाग की ओटीएस योजना के लक्ष्य हासिल करने में मथुरा की चाल अभी तक बेहद सुस्त रही है। पहला फेज खत्म होने के बाद विभागीय अधिकारियों को शुक्रवार को अचानक लखनऊ तलब कर लिया गया है। इससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। माना जा रहा है कि अच्छा प्रदर्शन न करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही होगी।
अभी तक मथुरा में तैनात एक अधिशासी अभियंता पर गाज गिरी है और उन्हें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम भेजने का निर्देश दिये गये हैं। विभाग में इस बात की चर्चा है कि कार्यवाही का ये क्रम आगे भी जारी रह सकता है। वर्तमान में जारी ओटीएस योजना एक नवम्बर से 31 दिसम्बर तक है, लेकिन इस योजना का लाभ पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जा रहा है।एक नवम्बर से 30 नवम्बर तक 90 प्रतिशत छूट थी। अब एक दिसम्बर से 15 दिसम्बर तक 80 प्रतिशत छूट है।
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यह छूट 15 दिसंबर से 31 दिसम्बर तक 70 प्रतिशत रह जाएगी। जितनी जल्दी उपभोक्ता रजिस्ट्रेशन करा लेगा उसे उतनी ही अधिक छूट मिलेगी। जबकि बिजली चोरी के मामलों में 65 प्रतिशत की छूट निरंतर जारी रहेगी। जनपद भर में विद्युत विभाग का कुल उपभोक्ताओं पर 568 करोड़ रुपया बाकी है। इसमें सरकारी विभाग, किसान, घरेलू, कमर्शियल आदि समस्त प्रकार के उपभोक्ता है।
बिजली चोरी में मात्र 7.69 प्रतिशत ने ही कराया रजिस्ट्रेशन
जिस समय योजना लागू हुई जनपद में बिजली चोरी की कुल 20 हजार 541 मामले दर्ज थे। इनमें से 15 सौ 98 उपभोक्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यह कुल मामलों का 7.69 प्रतिशत है। प्रदेश में बिजली चोरी के मामलों को पहली बार ओटीएस में शामिल किया गया है और वहीं अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह पहली और आखिरी बार है। सबसे आकर्षक छूट भी बिजली चोरी के मामलों में ही दी गई है।
कुल लक्ष्य का 36 प्रतिशत ही हासिल हुआ
जनपद में ओटीएस के 8 दिसंबर तक 44 हजार 323 रजिस्ट्रेशन हुए हैं। जबकि जनपद को एक लाख 23 हजार का लक्ष्य दिया गया था। यह लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 36 प्रतिशत है। 44 हजार 323 उपभोक्ताओं पर कुल लगभग 59 करोड रुपया बकाया था। जिसमें से 41 करोड के लगभग जमा हुआ है। लगभग 17 करोड 81 लाख रुपये छूट के मामलों में बकाया है। योजना के तहत ज्यादातर रजिस्ट्रेशन देहात क्षेत्र में हुए हैं।

