मथुरा जनिये कब बजती है बरसाना में लाडली जी मंदिर की आपातकालीन घंटी

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न्यूजलिंक हिंदी मथुरा। बरसाना श्रीलाडली जू मन्दिर (विश्व प्रसिद्ध श्रीराधारानी मन्दिर) में पुरातन काल से ही आपातकालीन बड़ी घण्टी की व्यवस्था की गयी थी। बताया जाता है कि मुगलकाल से ही श्रीराधारानी मन्दिर में आपातकालीन बडी घण्टी स्थापित की गयी थी। वैसे तो घंटी भगवान के भोग और आरती के लिए स्थापित की जाती है। अध्यात्म में घंटी को भगवान के पार्षदों में गिना जाता है। क्यों कि आरती और भोग का संकेत व भगवान का आह्वान घंटी बजाने पर ही होता है। इस लिए निरन्तर भगवान की सेवा में रहने के कारण भगवान के पार्षदों में घण्टी आती है।

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लेकिन बरसाना के श्रीराधारानी मंदिर में बड़ी घण्टी का एक बहुत बड़ा महत्व व कार्य भी है। पूर्वकाल में मन्दिरों पर हमला व लुटेरों से बचने के लिए एक बड़ी घण्टी मन्दिर में बहार की तरफ लगायी जाती थी। जिसे बजा कर लोगों को आपातकालीन स्थिति का संकेत देकर सुचना दी जाती थी। असमय में बडी घण्टी के बजने से सैकड़ों की संख्या में लोग मन्दिर की ओर अपने अपने उपयुक्त साधनों को लेकर दौड़ पड़ते थे।

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और मन्दिर की रक्षा के लिए आपातकालीन स्थिति को देख मन्दिर को बचाने के लिए लडने व मन्दिर को बचाने में अपने प्राणों की चिन्ता को छोड़ कर युद्ध तक के लिए तैयार रहते थे। ऐसा बरसाना के श्रीराधारानी मंदिर में कई बार आपत्ति व आपात स्थिति आने पर बड़ी घंटी बजाकर घटना को रोका गया है। बताया जाता है कि लगभग 35 वर्ष पूर्व बरसाना के ही श्रीराधारानी मंदिर के सेवायत जुगल किशोर गोस्वामी की सेवा मंदिर में चल रही थी। उस समय मंदिर में दर्शन करने मात्र कुछ व्यक्ति ही पहुंचते थे। न ही आज के समय जैसी श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी। न सुरक्षा व्यवस्था ही थी।

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बस जिस पुजारी की सेवा होती वह अपने परिवार के चार छह लोगों के साथ सेवा करते थे। न ही इतनी कोई आमदनी ही थी। बस सेवा का भाव लिए जुगल किशोर गोस्वामी भी सेवा कर रहे थे। बरसाना के ग्रामीणों में यह बात आज भी सच मानी जाती है कि एक समय राजस्थान की तरफ से आये ड़ाकू मन्दिर के पीछे पहाड़ी की तरफ से मन्दिर को लूटने के उद्देश्य से मन्दिर की तरफ आ रहे थे। बडी संख्या में डाकूओं ने मन्दिर को घेर लिया। यह देख पुजारी ने आपातकालीन बडी घण्टी बजा डाली। आपातकालीन बड़ी घण्टी की आवाज सुन बरसानावासियों ने मन्दिर में किसी अप्रिय घटना की सुचना जान तुरन्त जो जिस स्थिति में थे वे मन्दिर की ओर दौड पड़े।

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बरसानावासी सैकड़ों की संख्या में मन्दिर को बचाने को दौड़ने लगे। गांव वालों का कोलाहल सुन और मधुमक्खियों के आक्रमण से ड़ाकूओं के पैर उखड़ गए। ऐसी ही किसी घटना व अनहोनी की वजह से असमय आपातकालीन बड़ी घण्टी बजायी जाती हैं। जिसका संकेत किसी भी अप्रिय घटना को सूचित करना होता है। वहीं घण्टी की आवाज ही बरसानावासी व पुलिस प्रशासन को घटना का संदेश देती हैं। क्योंकि मन्दिर से आवाज लगाने पर आवाज अधिक दूर तक नहीं जाती और घण्टी की आवाज दूर दूर तक सुनायी देती है।

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