न्यूज़लिंक हिंदी, मिजोरम। 40 विधानसभा सीटों में से 27 सीटों पर लालदुहोमा की पार्टी जेडपीएम ने जीत दर्ज की है और आज लालदुहोमा मिजोरम के सीएम पद की शपथ लेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने लालदुहोमा के शपथ ग्रहण समारोह की पूरी जानकारी दी।
तेलंगाना के बाद अब मिजोरम को भी नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा। जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के नेता लालदुहोमा मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों में से 27 सीटों पर लालदुहोमा की पार्टी जेडपीएम ने जीत दर्ज की है जबकि मिजो नेशनल फ्रंट को 10 सीटें मिली थी। बीजेपी को 2 तो कांग्रेस को 1 सीट मिली थी।
अधिकारी ने बताया कि “लालदुहोमा के अलावा उनके मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्य भी शुक्रवार को शपथ ग्रहण करेंगे। राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति लालदुहोमा के अलावा अन्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। बताया गया है कि सुबह 11 बजे से शपथ ग्रहण समारोह शुरू होगा।
उन्होंने बताया कि “अगर मौसम ठीक रहा तो लालदुहोमा का शपथ ग्रहण समारोह राजभवन परिसर में आयोजित किया जाएगा, लेकिन मौसम ठीक नहीं रहने की स्थिति में कार्यक्रम विधानसभा के एनेक्सी भवन में आयोजित किया जाएगा. बता दें कि आइजोल में गुरुवार को भी भारी बारिश हुई थी.”
मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री ही हो सकते हैं
बता दें कि मिजोरम में 40 सदस्यीय विधानसभा है और राज्य में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री ही हो सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि लालदुहोमा अपनी कैबिनेट में 12 ही मंत्री रखेंगे। इससे पहले विधानसभा चुनाव में जेडपीएम ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था। उसे 40 में से 27 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं एमएनएफ को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। एमएनएफ खाते में महज 10 सीटें ही आई थीं।
जोरमथंगा ने 30 साल बाद दिया इस्तीफा
इससे पहले मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने विधानसभा चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की करारी हार की वजह से मंगलवार को पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने करीब 33 साल बाद पार्टी के अध्यक्ष पद को छोड़ा है। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था कि पार्टी के अध्यक्ष के रूप में चुनावी हार के लिए मैं नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं।
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बता दें कि लालदुहोमा एक पूर्व आईपीएस अधिकारी है। जो इंदिरा गांधी की सिक्योरिटी संभाल चुके हैं। लालदुहोमा 1984 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीते थे। इसके बाद उनका कांग्रेस से मतभेद हो गया तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके लिए दल-बदल कानून का उपयोग किया गया। इसके बाद उनके नाम एक अनोखा रिकाॅर्ड दर्ज हो गया। वे दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले पहले सांसद बन गए। इसके बाद उन्होंने 2018 में आइजोल पश्चिम सीट से निर्दलीय चुनाव जीता।

