न्यूज़लिंक हिंदी। जैसे-जैसे अब नई टेक्नोलॉजी लोगों पर हावी होती जा रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराधों में भी इजाफा भी देखने को मिल रहा है। कभी एटीएम फ्रॉड तो कभी स्पेशल स्कीम के नाम पर भोले भले ही नहीं बल्कि पढ़े-लिखे लोग तक जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं।
और अपने मेहनत की पूंजी इन साइबर ठगों के हवाले कर देते हैं। ऐसा ही एक केस मध्यप्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी के शिकारों की फेहरिस्त छोटी नहीं है। हाल ही में इन ठगों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए नया तारीक भी इजाद किया है। अब साइबर ठग बड़ी-बड़ी नामी कंपनियों के कस्टमर केयर के नंबर रिप्लेस कर लोगों को पूर्ण रूप से चूना लगा रहे हैं।
जिस तरह इंटरनेट का उपयोग लगातार बढ़ा है, बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने उपभोक्ताओं की सेवा और सुविधाओं के लिए कस्टमर केयर संपर्क यानी कस्टमर केयर टोल फ्री नंबर उपलब्ध कराती हैं लेकिन साइबर ठग अब इस बात का फायदा जमकर उठाने लगे हैं।
वह बड़ी-बड़ी कंपनियों के टोल फ्री नंबर के बदले इंटरनेट पर अपने मोबाइल नंबर रिप्लेस कर रहे हैं और इन नंबरों पर संपर्क करने वाले लोगों के अकाउंट भी खाली कर रहे हैं। ऐसी ही एक ठगी के शिकार ग्वालियर नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी हुए हैं।
बता दें कि साइबर ठगों के द्वारा जालसाजी का शिकार होने वाले नगर निगम के उपायुक्त पहले व्यक्ति ही नहीं है, इससे पहले भी ग्वालियर के सीपी कॉलोनी में रहने वाली एक रिटायर्ड टीचर आशा भटनागर को अप्रैल में साइबर ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच से होना बताकर हाउस अरेस्ट कर 51 लाख की ऑनलाइन ठगी को मुख्य रूप से अंजाम दे दिया था।
जिसमें उनके पूरे जीवन भर की गाढ़ी जमा पूंजी चली गई थी और आज तक पैसा रिकवर नहीं हो सका। वहीं मई 2024 में भी एक महिला मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर सुजाता बापट को भी ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर 38 लाख रुपये की ठगी की थी।

