वक्फ बिल के पास होने से मुस्लिम समुदाय में रोष, मु. अली आलम ने इस्तीफा देने का किया एलान

0
209

वक्फ बिल के पास होने से मुस्लिम समुदाय में बहुत ही रोष है। उनका कहना है कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ चुनावी हथकंडा ही अपनाया है।

जदयू अल्पसंख्यक सेल के जिलाध्यक्ष सह बीससूत्री सदस्य जफर आलम ने भी इस बिल का विरोध किया है। वहीं लोजपा रामविलास अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मु. अली आलम ने इसका विरोध करते हुए पार्टी से इस्तीफा देने का भी एलान किया है।

साथ ही सदन में वक्फ बिल पास होने के बाद मुस्लिम संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मिली जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। धोरैया से लगातार जिला पार्षद रहे रफीक आलम कहते हैं कि वक्फ दान की मिली भूमि का बोर्ड है।

इसमें मुस्लिम समुदाय का मस्जिद, मदरसा, खानकाह, कब्रिस्तान आदि की जमीनों को शामिल भी किया गया है।और रफीक आलम ने कहा कि वक्फ पर राजनीति चुनावी हथकंडा है।

आने वाले समय में कई राज्यों में चुनाव है। इसलिए सरकार इसे हवा भी दे रही है।
इमरते सरिया के जिलाध्यक्ष मौलाना युनूस कासमी कहते हैं कि किसी ने धार्मिक स्थलों के लिए सौ, दो सौ साल पूर्व यह जमीन दान की है।

इसके बाद से उसका इस पर कब्जा है।वक्फ की कोई जमीन सरकार की नहीं है। और अब इस जमाने में लोग अपने निजी जमीन का कागज ठीक नहीं कर पाते हैं। ऐसे में धार्मिक जमीन का कागज ठीक करवा पाना बहुत ही मुश्किल है।

और इसमें सुनवाई के लिए जिलाधिकारी को अधिकार भी दिया गया है। मगर उनके पास भी जमीनों का कागज चाहिए। निश्चित रूप से यह बिल धार्मिक भेदभाव वाला ही है।

उलेमा काउंसिल के जिलाध्यक्ष मु. कमाल कहते हैं कि वक्त बिल पर संगठन की बैठक है। अभी बिल का अध्ययन भी नहीं किया गया है। जुबानी बात सुनी गई है। इसका अध्ययन करने के बाद भी इसके नफा नुकसान पर संगठन में अपना पक्ष रखेगा।

साथ ही सूईया मदरसा के सदस्य मु. अख्तर हुसैन बताते हैं कि धार्मिक मसले में सियासत की दखलअंदाजी बिल्कुल ठीक नहीं है। देश में अमन चैन बनाए रखने के लिए इसकी कोई भी जरूरत नहीं थी।

इसके अलावा जदयू अल्पसंख्यक सेल के जिलाध्यक्ष सह बीससूत्री सदस्य जफर आलम भी इस बिल के खिलाफ हैं। वे कहते हैं कि बिल पूरी तरह मुसलमानों के खिलाफ है। किसी के धार्मिक स्थल में आप दूसरे धर्म के लोगों को सदस्य बना रहे हैं। यह कैसे संभव बना रहे है।

साथ ही लोजपा रामविलास अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मु. अली आलम भी इस बिल के भी खिलाफ हैं। और उन्होंने कहा कि बिल मुसलमानों के बेहद खिलाफ है। उनकी पार्टी ने इसका सदन में समर्थन भी किया है। और इसके खिलाफ वे पार्टी से त्यागपत्र भी देने जा रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here