दलितों से बदतर हालत में मुस्लिम एएमयू स्पेशल स्टेट्स पर सुनवाई के दौरान भिड़े सिब्बल-तुषार,जानिए क्या दलीलें दे रहे हैं

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न्यूज़लिंक हिंदी। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्पेशल स्टेट्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ताबड़तोड़ दलीलें देते रहे हैं। बुधवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिब्बल ने तर्क दिया कि देश में शिक्षा के मामले में मुसलमानों की हालत अनुसूचित जातियों से भी नीचे है।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को पर्याप्त रूप से सशक्त नहीं बनाया गया है। हालांकि, सिब्बल के तर्क देने के दौरान सरकार की तरफ से दलील दे रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी पलटवार भी किया। वैसे जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म किए जाने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान अक्सर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के दौरान नोकझोंक बराबर होती रहती थी।

बुधवार को भी दोनों के बीच दलील रूपी आरोप-प्रत्यारोप जमकर चले। जब भी ये दोनों वकील आमने-सामने होते हैं, उनकी भिड़ंत रोचक होती है। मामला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्पेशल स्टेट्स को लेकर चल रही सुनवाई का था। सिब्बल ने दलील दी कि अनुच्छेद 30 के अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार में तो सिर्फ कुछ आरक्षण की बात हुई है और अब उन्हें भी छीन भी लिया जाएगा।

अगर हमारे प्रशासन में अनुचित दखल दिया गया तो निश्चित रूप से अदालतों का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। मैं ये बताना चाहता हूं कि शिक्षा के मामले में मुसलमान अनुसूचित जातियों से भी नीचे हैं। ये तथ्य सच हैं।

हमें पर्याप्त रूप से सशक्त नहीं बनाया गया है और खुद को सशक्त बनाने का एकमात्र तरीका शिक्षा का माध्यम है और अधिकांश लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में अल्पसंख्यक बहुत कम हैं और केवल बहुसंख्यक हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र संसद द्वारा पारित कानून का समर्थन करने के लिए पूर्ण रूप से बाध्य है।

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