विभिन्न संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए भारत ने टीका खोज में एक और नई सफलता पूर्ण रूप से हासिल की है।
भारतीय शोधकर्ताओं ने अब हैजा संक्रमण से बचने के लिए एक टीका विकसित किया है जिसके सभी परीक्षण पूरी तरह सफल हुए।
और बुधवार को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने इस टीका पर हुए तीसरे चरण के परीक्षण परिणाम भी जारी कर दिए जिसके बाद जल्द ही इसके बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है।
कंपनी ने इस टीका को हिलचोल नाम दिया है जो कोलेरा जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए बनाई गई है।
और यह दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलने वाली बैक्टीरियल बीमारी है। कंपनी ने दावा किया है कि परीक्षण परिणाम में यह टीका एक वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों में पूरी तरह सुरक्षित और असरदार पाया गया है।
और यह हैजा बैक्टीरिया के दो प्रमुख स्ट्रेन ओगावा और इनाबा के खिलाफ एंटीबॉडी पैदा करने में सक्षम हैं। इस परीक्षण यह भी कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन से अनुमति प्राप्त दुनिया भर में मौजूद हैजा के टीका और भारत के इस हिलचोल के परिणामों में बड़ा अंतर भी नहीं है।
भारत में हर साल एक हजार लोगों की आबादी पर औसतन 1.6 हैजा मामले मिल रहे हैं, जबकि तीव्र दस्त को लेकर एक हजार की आबादी पर औसतन 40 मामले लगातार मिल रहे हैं।
और साल 2011 और 2020 के बीच देश के अलग अलग हिस्सों में 565 बार हैजा का प्रसार बढ़ने के मामले पाए गए हैं, जिनमें करीब 45,759 लोग इस बीमारी की चपेट में आए और उनमें से 263 लोगों की मौत भी हुई।
फिर इस परीक्षण को वैक्सीन नामक जर्नल में प्रकाशित किया है। इसके अनुसार, तीसरे चरण के परीक्षण में कुल 1,800 लोगों को शामिल किया।
इसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों से वयस्क, बच्चे और एक से पांच साल तक के शिशुओं को शामिल भी किया।
और इन सभी तीन अलग अलग समूह में विभाजित करने के बाद जब तुलनात्मक अध्ययन किया गया तो हिलचोल टीका की दो खुराक ने हैजा से बचाव के लिए पूरी तरह सुरक्षित एंटीबॉडी भी विकसित कीं।
साथ ही कंपनी ने बताया कि यह हिलचोल एक सिंगल-स्ट्रेन टीका है। यह विब्रियो कोलेरा जीवाणु के दो स्ट्रेन को निष्क्रिय करके ही बनाया है।
और इसमें खास किस्म की तकनीक का इस्तेमाल भी किया है जो अन्य टीकाें में नहीं किया जाता है। और इससे यह हैजा के दो अलग-अलग स्ट्रेन के खिलाफ एक जैसी सुरक्षा देने में मदद भी करता है।