दिल्ली के चुनाव को आप, बीजेपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला सभी लोग मानते हैं। लेकिन यह सच नहीं है।
हकीकत में दिल्ली में हमेशा से द्विध्रुवीय मुकाबला बन रहा है। यह मुकाबला आप और बीजेपी के बीच है। कांग्रेस का कोई खास दमखम नहीं दिखता। 2020 के चुनाव में 70 में से 55 सीटों पर प्रत्याशियों को पूर्ण बहुमत से जीत मिली थी।
यानी, जीतने वाले उम्मीदवार को 50% से ज्यादा वोट मिले थे। इनमें से 51 सीटें आप ने और 4 बीजेपी ने जीती थीं। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। सिर्फ 15 सीटों पर ही त्रिकोणीय मुकाबले हुए थे।
और आपका दिल्ली पर कब्जा करना काबिले तारीफ है। राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं कि बीजपे की अपार लोकप्रियता के सामने आप टिकी हुई है।
बीजेपी के उदय और दबदबे का कारण मध्य वर्ग का समर्थन माना जाता है। लेकिन, आप की शुरुआत अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और दिल्ली के मध्य वर्ग के भारी समर्थन से ये धारणा टूटती है कि मध्य वर्ग एक ही पार्टी को वोट देता है।
आप के लिए चुनौती है कि ‘रेवड़ी राजनीति’ के आरोपों ने उसे कितना नुकसान पहुंचाया है। चुनाव नतीजे बताएंगे कि गरीबों को ‘मुफ्त की चीजें’ देकर आप का मध्य वर्ग में समर्थन लगातार घटा है या नहीं।
मध्य वर्ग का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय चुनावों में बीजेपी का समर्थक है। यह अभी साफ नहीं है कि उत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में शहरी गरीबों का समर्थन पाकर आप ने मध्य वर्ग को नाराज किया है या नहीं।
इसके अलावा कांग्रेस की रैलियां दलितों और मुसलमानों को लुभाने में जुटी हैं, जो शहर के गरीबों का एक बड़ा हिस्सा हैं, खासकर पूर्वी इलाकों में। आप के सामाजिक गठबंधन में सेंध लगाने की यह रणनीति बीजेपी को आप से वोट शेयर छीनने में मदद कर सकती है।
लेकिन शहर के दूसरे हिस्सों में इसका कितना असर होगा? शायद ज्यादा नहीं। सार ये है कि दिल्ली का चुनाव एक बार फिर से द्विध्रुवीय मुकाबला जमकर होगा।