अब सुप्रीम कोर्ट का UPSC, SSC, IBPS समेत सभी सरकारी भर्ती परीक्षाओं पर हुआ बड़ा आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्क्राइब की सुविधा के लिए बेंचमार्क डिसेबिलिटी 40 फीसदी या उससे ज्यादा होना बेहद जरूरी नहीं है।
यह फैसला विकास कुमार बनाम UPSC मामले में दिए गए फैसले के आधार पर दिया गया। इसके अतिरिक्त उसकी स्थायी विकलांगता 25% आंकी गई है। उसे IBPS, SBI, SSC, BSSC और भारत सरकार के दिव्यांगजन विभाग की ओर से स्क्राइब की सुविधा देने से मुख्य रूप से इनकार कर दिया गया था, क्योंकि उनकी विकलांगता 40% से कम थी।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि विकास कुमार केस में दिए गए फैसलों के बावजूद परीक्षा प्राधिकरण ‘बेंचमार्क डिसेबिलिटी’ का हवाला देकर स्क्राइब देने से मना कर रहे थे। उसने 10 अगस्त 2022 के ऑफिस मेमोरेंडम को चुनौती दी, जिसमें स्क्राइब की सुविधा को सीमित रूप में लागू करने की पूर्ण बात कही गई थी।
और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि इससे पहले UPSC के नियम के तहत केवल नेत्रहीन, सेरेब्रल पॉल्सी आदि में 40 फीसदी से ज्यादा डिसेबिलटी के शिकार उम्मीदवार को ही स्क्राइब सुविधा भी दी जाती थी।
अब यह सुविधा उन उम्मीदवारों को भी मिलेगी, जिनकी लिखने की क्षमता प्रभावित है, विकलांगता भले ही 40 फीसदी से कम हो।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नोडल एजेंसी 10 अगस्त 2022 के ऑफिस मेमोरेंडम की समीक्षा करे और आवश्यक संशोधन 2 महीने के भीतर ही लागू करे।
सभी परीक्षा प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि वे इन दिशानिर्देशों का पालन संयुक्त रूप से करें।
और यह फैसला सुनिश्चित करता है कि जो भी उम्मीदवार लिखने में कठिनाई का सामना करते हैं, उन्हें बिना किसी अनावश्यक बाधा के स्क्राइब की सुविधा मिलेगी।
इससे परीक्षा प्रणाली अधिक समावेशी बनेगी और दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा भी होगी। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को अब स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत कार्य करना होगा, जिससे उम्मीदवारों को कानूनी लड़ाई बिल्कुल भी नहीं लड़नी पड़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।