विपक्षी गठबंधन इंडिया को 234 सीटें मिली,आखिर किसका राजतिलक होगा, केंद्र में सरकार कौन बना सकता है,जानिए

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न्यूज़लिंक हिंदी। लोक सभा चुनाव में 240 सीटें हासिल कर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी दूर है। सरकार बनाने के लिए बीजेपी को अब टीडीपी और जेडीयू सहित सहयोगी दलों का सहारा है।

बुधवार सुबह जैसे ही आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और बिहार के सीएम नीतीश कुमार एक ही प्लेन में आगे-पीछे बैठे हुए नजर आए, केंद्र में सरकार गठन को लेकर सियासी कयास भी शुरू हो गए। दरअसल, विपक्षी गठबंधन इंडिया को 234 सीटें मिली हैं। ऐसे में एक सवाल हर किसी के मन में है कि आखिर किसका राजतिलक होगा? केंद्र में सरकार कौन बना सकता है?

सबसे पहले बात एनडीए की, जिसे लोकसभा चुनाव में 292 सीटें मिली हैं। केंद्र में सरकार बनाने के लिए 272 सीटों की जरूरत है। एनडीए की 292 सीटों में बीजेपी की 240, टीडीपी की 16, जेडीयू की 12, शिवसेना की 7, एलजेपी की 5, जेडीएस की 2, आरएलडी की 2, जेएसपी की 2, एजीपी की 1, यूपीपीएल की 1 एजेएसयूपी की 1, एनसीपी की 1, हम की 1 और अपना दल की 1 सीट मुख्य रूप से शामिल है।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया अब जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार को अपने पाले में लाने की कोशिश कर सकता है। चूंकि नीतीश कुमार इससे पहले भी कई बार पाला बदल चुके हैं, इसलिए ऐसे में ये चर्चा और ज्यादा हलचल मचा रही है।

अब अगर मान लें कि नीतीश कुमार एक बार फिर एनडीए छोड़कर इंडिया में शामिल होते हैं तो उनके 12 सांसदों के हटने से एनडीए की संख्या घटकर 280 हो जाएगी। यानी, एनडीए के पास उस स्थिति में भी सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल रहेगा। सोशल मीडिया पर एक और कयासबाजी चल रही है कि चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी को भी विपक्ष अपने साथ लाने की कोशिश कर सकता है।

अब अगर ये भी मान लें कि नीतीश कुमार के बाद चंद्रबाबू नायडू एनडीए छोड़ सकते हैं, तो उनके 16 सासंदों को हटाने के बाद एनडीए की सीटों की संख्या घटकर 264 हो जाएगी। यानी, मैजिक नंबर से एनडीए 8 सीट पीछे हो जाएगी। इस स्थिति में जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी के 4 सांसदों और 7 निर्दलीयों की मदद से एनडीए के सरकार गठन की संभावना मुख्य बनी रहेगी।

अब विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ पर आते हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों में ‘इंडिया’ को 234 सीटें मिली हैं। इनमें कांग्रेस की 99, समाजवादी पार्टी की 37, तृणमूल कांग्रेस की 29, डीएमके की 22, शिवसेना  की 9, एनसीपी की 8, आरजेडी की 4, सीपीएम की 4, आईयूएमएल की 3, आम आदमी पार्टी की 3, जेएमएम की 3, जेकेएनसी की 2, वीसीके की 2, सीपीआई की 2, सीपीआई  की 2 और केसी, आरएलटीपी, बीएडीवीपी, एमडीएमके और आरएसपी की 1 सीट शामिल है। इस तरह विपक्षी गठबंधन सरकार बनाने के संख्या बल से 38 सीटें पीछे है।

अब अगर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ केंद्र में सरकार बनाने की तरफ कदम बढ़ाता है, तो सबसे पहले उसे इन 38 सीटों का इंतजाम मुख्य रूप से करना होगा। मान लीजिए कि पप्पू यादव को छोड़कर 6 निर्दलीय और आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर का समर्थन विपक्ष को मिलता है, तो उसकी संख्या 234 से बढ़कर 241 हो जाएगी।

यानी अभी भी बहुमत के आंकड़े से 31 सीट दूर। यहां आकर अगर ऊपर लिखे समीकरण के हिसाब से गिनती बिठाएं और नीतीश के साथ चंद्रबाबू नायडू को भी जोड़ें तो दोनों के सांसदों की संख्या मिलने के बाद विपक्ष के पास 269 सीटें हो जाएंगी। ये संख्या 272 के आंकड़े से अभी भी 3 सीट कम है।

अब इन तीनों सीटों के लिए विपक्ष को अपना दल (1) और आरएलडी (2) को साथ लेना होगा, जिसके बाद उसके पास बहुमत का आंकड़ा मुख्य रूप से बन जाएगा।

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