Pilibhit : जिला पंचायत में हुए टेंडर के खेल में, इस्तेमाल हुए फर्जी स्टांप पेपर, हुई FIR

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जिला पंचायत में टेंडर प्रक्रिया के बाद अब एक संगीन आरोप सामने आया है। और एक ठेकेदार को वंचित कर दूसरों को लाभ दिलाने के लिए फर्जी स्टांप व फर्जी हस्ताक्षर वाले प्रार्थना पत्र का इस्तेमाल भी किया गया था।

फिर एसपी से हुई शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है।

इसके साथ ही कोतवाली में दी गई तहरीर में पूरनपुर क्षेत्र के ग्राम मथना जप्ती के रहने वाले पवन दीप सिंह पुत्र बलवीर सिंह ने ये बताया कि वह वर्ष 2014 से जिला पंचायत में ठेकेदारी कर रहे हैं।

फिर उन्होंने ई-निविदा 12 दिसंबर 2025 के अनुसार ईटेंडर क्रम संख्या 01, 02, 03, 34 और 154 के निर्माण कार्य के लिए नियमानुसार प्रस्तुत भी किया।

फिर उनके पक्ष में क्रम संख्या 03 का टेंडर स्वीकार हो गया और बाकी चार टेंडर 19 जनवरी 2026 को नॉन रिस्पॉन्सीम रीजेक्टेड टेक्निकली लिखकर निरस्त कर दिया गया।

और फिर जब ई-टेंडर विभाग से मोबाइल पर मेसेज आया कि उनके चार टेंडर टेक्निकल डूबेलूएशस के दौरान निरस्त भी हो गए हैं।

फिर तब उन्होंने विभाग में व्यक्तिगत रूप से पता किया। इस पर विभाग द्वारा बताया गया कि पीड़ित का कोई ई-स्टांप आया है, उसके आधार पर टेंडर निरस्त भी हुआ है।

फिर इसके बाद व्यक्तिगत व रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र डीएम को दिया और जिला पंचायत के अधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी कर टेंडर निरस्त करने की शिकायत भी की।

ये भी बताया कि पीड़ित के द्वारा न तो कोई स्टांप पेपर खरीदा गया है, न ही कोई स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं।

और फिर धोखाधड़ी कर पीड़ित को क्षति पहुंचाने और व्यापार को खत्म कर छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही जिला पंचायत के अधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी की गई है।

मुख्यमंत्री, कमिश्नर और एएमए जिला पंचायत से शिकायत की गई लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। अब एसपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज की है।

इसके अलावा पीड़ित ने बताया कि जब अधिकारियों के स्तर से कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने उच्च न्यायालय में रिट डाली।

इसकी दो फरवरी 2026 को सुनवाई हुई। फिर जिसमें विभाग प्रथम बार 100 रुपये के स्टांप पर एएमए को प्रेषित प्रार्थना पत्र आठ जनवरी 2026 का प्रस्तुत किया।

और जिसकी प्रति न्यायालय के मौखिक आदेश के बाद विभाग के अधिवक्ता की ओर से प्रदान की गई।

फिर उनका ये भी कहना है कि उक्त प्रार्थना पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे और निविदा क्रम संख्सा 01, 02, 34 और 154 की टेंडर प्रक्रियाओं से बाहर होने का 100 रुपये का स्टांप दिया गया था, जोकि बिल्कुल फर्जी था।

फिर उनका कहना है कि 22 दिसंबर 2025 को उन्होंने 100 रुपये का कोई स्टांप खरीदा ही नहीं था। फिर ये साजिश के तहत चार टेंडर निरस्त किए गए हैं।

इसके अलावा पीड़ित ठेकेदार का आरोप है कि इसमें जिला पंचायत के अधिकारियों की पूरी मिलीभगत रही है।

और उनका कहना है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर प्रार्थना पत्र पर हैं। फिर इस तरह का फर्जी प्रार्थना पत्र विभाग ने बिना उन्हें सूचित किए न सिर्फ स्वीकार किया बल्कि पीड़ित के टेंडर भी निरस्त कर दिए गए।

और अब ऐसे में साफ है कि विभाग के अधिकारी कर्मचारी और लाभार्थियों द्वारा ही ये सब पूरी तरह से फर्जीवाड़ा किया गया है।

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