राजे-रजवाड़ों की धरती है प्रतापगढ़,यहाँ पर हैं कांटे की लड़ाई,भाजपा के सामने साख बचाने की चुनौती

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न्यूज़लिंक हिंदी। आम चुनाव में भाजपा सांसद संगम लाल गुप्ता के सामने जहां जीतने की मुख्य रूप से चुनौती है, वहीं समाजवादी पार्टी प्रत्याशी डॉ. एसपी सिंह पटेल के पास अपने नाम के आगे सांसद लिखवाने का मौका पूर्ण है।

बसपा ने युवा प्रथमेश मिश्र सेनानी को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। आमतौर पर मुद्दे दरकिनार हैं। विकास की चर्चा होती है तो जातीय समीकरण की भी। संसदीय क्षेत्र क्रमांक 39 प्रतापगढ़ के मुद्दों की बात करें तो यह कोई एक नहीं, अनेक हैं।

आंवला किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलता। खारा पानी मुसीबत है। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों की दशा बिल्कुल ठीक नहीं है। उद्योग नहीं हैं। रोजगार के अवसर के भी लाले पड़े हैं। बड़ी संख्या में लोग सूरत, मुंबई, दिल्ली, पंजाब, कानपुर में रोजी रोटी के लिए हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों की भारी कमी है। हास्टल नहीं हैं। ट्रैफिक प्लान नहीं है, मुख्यालय में जाम बड़ी समस्या है।

ऐतिहासिक स्थल उपेक्षित हैं। पर्यटन के नक्शे पर इसे उभारा बिल्कुल नहीं जा सका है। संसदीय क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ था। कालाकांकर राजघराने से राजा रामपाल सिंह कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में थे। इसी राजघराने के राजा दिनेश सिंह कांग्रेस से सांसद व विदेश मंत्री तक बने।

उनकी बेटी राजकुमारी रत्ना सिंह भी तीन अलग-अलग चुनावों में कांग्रेस से सांसद बनीं, हालांकि मौजूदा समय में वह भाजपा में हैं। इस बार कांग्रेस यहां सीधे मुकाबले में नहीं है। वह सपा के साथ गठबंधन में है। बसपा अकेले लड़ रही है।

मायावती, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और उनकी पार्टी के अन्य नेता भी यहां आ चुके हैं। मतदाता भी अब काफी हद तक खुलने लगे हैं। कचहरी रोड पर चाय पी रहे संजय पटवा कहते हैं ‘अबकी मुकाबला बड़ा दिलचस्प दिख रहा है।

अवधेश ओझा कहते हैं कि ‘सरकार में विकास भी तो हुआ है। भाजपा प्रत्याशी के लिए पूरी पार्टी लग गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभाएं भी हो चुकी हैं। गृहमंत्री अमित शाह फिर आने वाले हैं। गठबंधन धर्म निभाते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री व अपना दल एस की प्रमुख अनुप्रिया पटेल ताबड़तोड़ सभाएं कर रही हैं।

मीरा भवन निवासी अभिषेक तिवारी कहते हैं ,केवल भावनात्मक बातें करने से और धर्म ध्वज लहराने से ही रोजगार और किसानों की समस्या दूर नहीं होती। भाजपा प्रत्याशी के पास गिनाने को बहुत सारे काम हैं, लेकिन उनके दावों की काट भी सपा और बसपा प्रत्याशी लेकर घूम रहे हैं। सपा प्रत्याशी सभाओं में साफ कहते हैं कि स्वास्थ्य और शिक्षा में कुछ काम नहीं हुआ है। बसपा उम्मीदवार भी जिले की तस्वीर को बदरंग बताते हैं।

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