न्यूज़लिंक हिंदी। आज सुबह 4 बजे दो मालगाड़ी आपस में एक ही ट्रैक पर टकरा गई। इनमें से एक का इंजन पलट गया और साइड ट्रैक से गुजर रही पैसेंजर ट्रेन से टकरा गया। इस हादसे में मालगाड़ी के दो पायलट घायल हो गए। उन्हें पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
यह दुर्घटना पिछले साल ओडिशा के बालासोर में हुए हादसे से मिलती जुलती है। उस हादसे में एक दूसरी ट्रेन आकर रेलवे ट्रैक पर पहले से खड़ी ट्रेन से टकरा गई थी। इस टक्कर में पास से गुजर रही एक तीसरी ट्रेन भी इसकी चपेट में आ गई। ओडिशा रेल हादसे में 293 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 1000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। श्री फतेहगढ़ साहिब में हुए इस हादसे की रूपरेखा कुछ-वैसी ही है। हालांकि धीमी गति के कारण बड़ा हादसा टल गया।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के न्यू सरहिंद स्टेशन पर कोयले से लदी एक ट्रेन खड़ी थी, जिसे रोपड़ भेजा जाना था। इसी ट्रैक पर पीछे से कोयले से लदी एक और ट्रेन आ गई, जो पहले से खड़ी कोयले वाली मालगाड़ी से टकरा गई। इससे मालगाड़ी का इंजन पलट गया। इसी बीच कोलकाता से जम्मू जा रही स्पेशल समर ट्रेन अंबाला से लुधियाना के लिए रवाना हुई।
यह ट्रेन जब न्यू सरहिंद स्टेशन के पास पहुंची तो इसकी गति धीमी थी तभी दो मालगाड़ियां आपस में टकरा गई। टक्कर के बाद जब इंजन पलटा और पैसेंजर ट्रेन से टकरा गया। दुर्घटना के समय पैसेंजर ट्रेन की गति धीमी थी इसलिए चालक ने तुरंत ट्रेन रोक दी और बड़ा हादसा टल गया। हालांकि ट्रेन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई है।
इसके साथ ही ट्रैक भी क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद पैसेंजर ट्रेन में दूसरा इंजन लगाकर उसे राजपुरा के लिए रवाना किया गया। इसके साथ ही ट्रैक को सही करने का काम शुरू कर दिया गया है। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मालगाड़ी के डिब्बे भी आपस में टकरा गए। राहत बचाव कर्मियों ने इंजन की खिड़की तोड़कर अंदर फंसे लोको पायलट को बाहर निकाला। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हादसे के बाद रेल विभाग विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रहा है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि जब एक मालगाड़ी पहले से ही लाइन पर खड़ी थी, तो दूसरी ट्रेन उसी लाइन पर कैसे आ गई? साथ ही अगर मालगाड़ी को उसी लाइन पर आने का सिग्नल मिला था, तो चालक सामने खड़ी दूसरी ट्रेन को क्यों नहीं देख पाया। हादसे के पीछे लापरवाही की जांच की जा रही है।

