न्यूज़लिंक हिंदी। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राजस्थान में सभी को चौंकाते हुए सीएम पद के लिए भजन लाल शर्मा के नाम पर मुहर लगा दी। मिला जानकारी के मुताबिक, सीएम पद के लिए वसुंधरा राजे ने भजनलाल शर्मा के नाम का प्रस्ताव रखा था। इस पर सभी विधायकों ने सहमति जताई। बीजेपी ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में भी उस चेहरे को आगे कर दिया, जिसकी चर्चा नहीं थी। विधायक दल की बैठक शुरू हुई।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्य जेपी नड्डा का राजनाथ सिंह के पास कॉल आया। इसके बाद एक पर्ची पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के हाथ में दी गई। इस पर्ची में राज्य के होने वाले सीएम का नाम था। वसुंधरा राजे ने मीडिया के सामने आकर भजनलाल शर्मा के नाम का ऐलान कर दिया। राज्य में अनीता भदले को डिप्टी सीएम बनाया गया है
भजन लाल शर्मा भरतपुर के रहने वाले हैं। बाहरी होने के आरोप के बावजूद सांगानेर से बड़े अंतर से जीत दर्ज की। शर्मा ने कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48081 वोटों से हराया। भजन लाल शर्मा को संघ और संगठन दोनों का करीबी माना जाता है। भजन लाल शर्मा ब्राह्मण समाज से आते हैं। सिटिंग विधायक अशोक लाहोटी का टिकट काटकर प्रत्याशी बनाए गए थे। लंबे समय से बीजेपी और संगठन में काम कर रहे हैं। राजस्थान में करीब 7 फीसदी आबादी ब्राह्मण हैं।
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विधायक दल की बैठक में चुना गया नेता
इसके बाद पार्टी ने राज्य के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी थी। उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सस्पेंस पर विराम लगाने और विधायक दल का नेता चुनने के लिए सभी की सहमति बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। इसके बाद मंगलवार को हुई विधायक दल की बैठक में भजन लाल शर्मा को चुना गया।
विधायक बने सांसदों के इस्तीफे ने बढ़ा दी थी सरगर्मी
इससे पहले राजस्थान के राजसमंद की सांसद दीया कुमारी, जयपुर के सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राज्यसभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा और अलवर के सांसद बाबा बालक नाथ ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि पार्टी वसुंधरा के अलावा किसी दूसरे चेहरे पर दांव खेल सकती है।
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21 सांसदों को उम्मीदवार बनाया था
भाजपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में कुल 21 सांसदों को उम्मीदवार बनाया था। इनमें से 12 ने जीत दर्ज की है। भाजपा ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में सात-सात, छत्तीसगढ़ में चार और तेलंगाना में तीन सांसदों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा था।

