पाकिस्तान के हुक्मरान और वहां की मीडिया अपनी जनता के इर्द-गिर्द भ्रम की दुनिया तैयार करने में जुटी है। अपनी धूमिल छवि को चमकाने के लिए डिजीटल क्रिएटर एआई को मददगार बना रहे। अपनी भोली-भाली जनता को अधूरी जानकारी देकर उनके वर्तमान को गर्त में डालने का कार्य किया जा रहा है। पाकिस्तान मौजूदा समय में वह सब कुछ कर रहा है जो उसे नहीं करना चाहिए। यह कार्य पाकिस्तान और वहां के लोगों को पीछे ले जा रहा है। शिक्षा हो विकास हो वार हो या फिर खेल का मैदान… क्षेत्र कोई भी हो, लेकिन हर जगह 0 फीसदी की परफॉर्मेंस है और एटीट्यूड पूरा 100 फीसदी। यह स्थिति किसी भी देश के सुनहरे भविष्य के लिए बाधक है।

ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान में शिक्षित लोग नहीं है। पाकिस्तान में साक्षरता दर 2023 की जनगणना के अनुसार 60.6 फीसदी है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता 68 और महिलाओं की 52.8 फीसदी है। लेकिन, बड़ी आबादी आज भी मजहबी शिक्षा तक ही सीमित है। यही वह आबादी है जिसे हुक्मरान इस्तमाल कर रहे हैं। वह पाकिस्तान में बनाए जा रहे भ्रम के ताने-बाने में फंसते जा रहे हैं और खुद के विकास को मजहबी ताकत ही समझने लगे हैं। पाकिस्तान में खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं जैसे आटे, चिकन, प्याज, और पेट्रोल के दाम बहुत ऊंचे हैं, जिससे आम जनता परेशान है। देश विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा है और आईएमएफ के बेलआउट पैकेज पर निर्भर है।
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