अपात्र लोगों के फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले गिरोह का एसटीएफ की टीम ने पर्दाफाश किया है।
साथ ही एसटीएफ ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत सात आरोपियों को गोमतीनगर विस्तार इलाके से गिरफ्तार किया है।
और फिर आरोपी पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में ओटीपी बाइपास कर अपात्र लोगों को जोड़ते थे।
फिर इसके बाद इंप्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी और स्टेट हेल्थ एजेंसी के अधिकारियों की मिलीभगत से आयुष्मान कार्ड संस्तुति कराकर इलाज भी कराते थे।
इसके साथ ही एसटीएफ मुख्यालय के एएसपी विशाल विक्रम सिंह की टीम ने 24 दिसंबर की रात गोमतीनगर विस्तार स्थित खरगापुर विजय नगर कॉलोनी में छापा मारकर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
और फिर गिरोह का मास्टरमाइंड व मुख्य आरोपी प्रतापगढ़ का चंद्रभान वर्मा है। वह बीए पास है।
अन्य आरोपियों में इंप्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी के वर्तमान व पूर्व एक्जीक्यूटीव और स्टेट हेल्थ एजेंसी के ग्रीवांस एक्जीक्यूटिव, आयुष्मान मित्र और सहयोगी शामिल हैं।
इसके अलावा एएसपी विशाल के मुताबिक पूछताछ में चन्द्रभान वर्मा ने बताया कि वर्ष 2024 में उसने लखनऊ में साइबर कैफे खोला था।
फिर वहीं से उसने अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाने का नेटवर्क खड़ा किया। और फिर गिरोह पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में तकनीकी तरीके से ओटीपी बाइपास कर अपात्र लोगों को जोड़ता था।
फिर इसके बाद आईएसए और एसएचए में तैनात कर्मचारियों की मदद से कार्ड अप्रूव कराए जाते थे। प्रति कार्ड 6,000 रुपये तक वसूले जाते थे। अप्रूवल के लिए अलग-अलग स्तर पर रकम भी दी जाती थी।
इतना ही नहीं अभियुक्तों ने स्वीकार किया है कि अब तक 2000 से अधिक अपात्र व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड बनवाए जा चुके हैं।
इन कार्डों के जरिए विभिन्न अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराया गया। और फिर एसटीएफ ने इसी गिरोह के दो सदस्यों को जून 2025 में प्रयागराज से गिरफ्तार कर 84 फर्जी आयुष्मान कार्ड बरामद भी किए थे।
गिरोह के खिलाफ थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में बीएनएस की कई धाराओं और आईटी एक्ट की धारा में एफआईआर दर्ज की गई है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा जारी है।