न्यूज़लिंक हिंदी। शारदीय नवरात्रि चल रहे हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दौरान मां दुर्गा धरती पर विचरण करती हैं। ऐसे में नवरात्रि के दिनों माता रानी को प्रसन्न करना और भी ज्यादा आसान हो जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा विधि – विधान से की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा के इन स्वरूपों की पूजा से भक्तों को सुख-वैभव मिलता है। वैसे तो नवरात्रि के हर दिन का खास महत्व होता है, लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि नवरात्रि में कन्या पूजन करने की परंपरा है। कन्याओं को साक्षात मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस साल शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन किस दिन किया जाएगा और शुभ मुहूर्त क्या है…
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा के इन स्वरूपों की पूजा से भक्तों को सुख-वैभव मिलता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्र 15 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक चलेगा। इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की है। नवरात्रि में कन्या पूजन कुछ लोग दुर्गा अष्टमी के दिन तो वहीं कुछ लोग महानवमी के दिन करते हैं। आप अपनी सुविधा और मान्यता के अनुसार इस शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन 22 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी या 23 अक्तूबर को महानवमी के दिन कर सकते हैं। नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और कन्या पूजन का भी विधान है। कन्या पूजन से मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है।
अष्टमी व महानवमी पर कन्या पूजन का मुहूर्त
22 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 26 मिनट से शाम 06 बजकर 44 मिनट तक है। ऐसे में आप सुबह 06 बजकर 26 मिनट से कन्या पूजन कर सकते हैं। तो वही इस साल महानवमी 23 अक्तूबर को है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 27 मिनट से शाम 05 बजकर 14 मिनट तक है। ऐसे में आप 23 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 27 मिनट के बाद से कन्या पूजन कभी भी कर सकते हैं।
कन्या पूजन विधि
- कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं।
- उनकी कलाइयों के चारों ओर कलावा बांधें।
- माथे पर कुमकुम लगाएं।
- पूड़ी, हलवा, काला चना और नारियल को प्रसाद के रूप में खिलाएं।
- कन्याओं को दुपट्टे, चूड़ियां और नए वस्त्र उपहार में दें।
- कन्याओं के पैर छूएं और उनका आशीर्वाद लें।
- अंत में दक्षिणा देकर विदाई करें।
कन्या पूजन का महत्व
इस दिन व्रती छोटी कन्याओं को अपने घर बुलाकर उनको भोजन कराते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अनुष्ठान मां भगवती के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए किया जाता है। कंजक में कम उम्र के लड़के और लड़कियों को बुलाने का विधान है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक नवरात्रि के दौरान नौ दिन का व्रत रखते हैं और नवरात्रि के अंत में कन्याओं की पूजा करते हैं। उनके घर में हमेशा सुख-समृद्धि का वास होता है।
इसलिए हर किसी को यह पूजन करना चाहिए। बता दें, एक कन्या की पूजा से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दो कन्याओं की पूजा से ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं नौ कन्या की पूजा से सर्वोच्चता का आशीर्वाद मिलता है।

