न्यूज़लिंक हिंदी। सायबर फ्रॉड का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा हैं, म्यांमार और इंडोनेशिया में साइबर ठगी की फैक्ट्रियां चल रही हैं। इनके मालिक चीनी हैं। भारत और आसपास के देशों के युवाओं को थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर लोगो को फंसाया जाता है।
और फिर म्यांमार के जंगलों में साइबर ठगी करने वाली कंपनियों में भेज भी दिया जाता है। इसका खुलासा कानपुर में एक युवक ने किया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। भारत के पड़ोसी दक्षिण पूर्व एशियाई देशों, खासकर म्यांमार और इंडोनेशिया में साइबर ठगी की फैक्ट्रियां चल रही हैं। एक व्यवस्थित कंपनी का रूप देकर इनको संचालित भी किया जा रहा है।
किसी मल्टीनेशनल कंपनी की तरह इनका अपना कैंपस, कैंटीन, मार्केट और आवास भी हैं। कंपनी का साल भर का नफा दिखाने की बैलेंस शीट भी मुख्य रूप से जारी होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जाता। कंपनियों की अपनी निजी सेना भी है, जो गलती करने पर कर्मचारियों को अपंग बनाने से लेकर मौत तक की सजा भी देती है।
अब बड़ी बात यह है कि भले ही साइबर ठगी की ये फैक्ट्रियां म्यांमार, इंडोनेशिया में चल रहीं हों, लेकिन इनके मालिक चीनी ही हैं। भारत और आसपास के देशों के युवाओं को थाईलैंड में काल सेंटर में मोटी तनख्वाह पर नौकरी का लालच देकर लोगों को फंसाया जाता है। यह सनसनीखेज पर्दाफाश कल्याणपुर के रहने वाले शिवेंद्र ने ही किया है।
सूत्रों के मुताबिक, डीसीपी क्राइम आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस ने शिवेंद्र से पूछताछ भी की है। देश से बाहर डेरा जमाए ठगों पर कार्रवाई करना अभी बिल्कुल भी संभव नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जिन लोगों के गिरोह में शामिल हैं उनके खिलाफ जांच के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई जरूर की जाएगी।

