तीन साल के बाद इस बार नौतपा बिल्कुल भी नहीं तपा। नौतपा के आठ दिन पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक नहीं पहुंच पाया।
सामान्य औसत से अधिकतम तापमान इस दौरान भी कम रहा है। अधिकतम तापमान कम रहने और माहौल में नमी रहने की वजह से लू तो नहीं चली लेकिन उमस भरी गर्मी ने शहरियों को बेहाल किया।
और मौसम विज्ञानियों का कहना है कि जिस साल नौतपा नहीं तपता उस बार मानसून तो जल्दी आ जाता है लेकिन बारिश ढंग की नहीं होती।
और बारिश न होने से धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फिर इस बार नौतपा के दौरान 5.6 मिमी बारिश भी हुई है।
और आगे उन्होंने बताया कि नौतपा न तप पाने पर मानसून पहले जरूर आ जाता है लेकिन बारिश उस स्तर की नहीं हो पाती। नौतपा के आठ दिनों में तापमान 40 डिग्री नहीं पहुंच पाया।
और फिर इस बीच सबसे अधिक तापमान 39.9 डिग्री 30 मई को रहा है। और यह सामान्य औसत से 0.9 डिग्री कम था।
सीएसए के मौसम विभाग ने चार और पांच जून को तेज हवा और गरज-चमक के साथ स्थानीय स्तर पर बारिश का पूर्वानुमान भी जारी किया है। ये भी बता दें कि नौतपा में 40 से 43 डिग्री तक तापमान अमूमन जाता है।
इसके अलावा मानसून केरल तक पहुंच गया है लेकिन बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाने के कारण हवाओं का रुख उस तरफ हो गया है।
इससे मानसून भी धीमा पड़ा है। और इससे पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि मानसून 15 जून तक कानपुर परिक्षेत्र में दस्तक दे देगा लेकिन अब इसके 20 जून तक पहुंचने की उम्मीद है।