न्यूज़लिंक हिंदी। कांवड़ यात्रा के रास्ते में आने वाली सभी खाने की दुकानों, ढाबों और ठेलों पर मालिक की नाम प्लेट लगाने का विवादित फरमान विदेश तक अब पहुंच गया है।
यूपी सरकार के इस आदेश पर भारत में विवाद थमा भी नहीं था कि एक पाकिस्तानी जर्नलिस्ट ने इसको व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग में भी उठा दिया। पाकिस्तान के पत्रकार ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मैथ्यू मिलर से सवाल किया कि भारत में बीजेपी शासित प्रदेशों में मुस्लिम दुकानदारों से उनके नाम लिखने के आदेश पर आप क्या सोचते हैं।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस महीने की शुरुआत में आदेश दिया था कि कांवड़ यात्रा के रूट पर पड़ने वाले सभी ढाबों और ठेलों के मालिक और काम करने वालों को नाम प्लेट लगानी जरूरी होगी। यूपी सरकार के इस कदम पर चलते हुए मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी ये आदेश लागू किया गया था। हालांकि, 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
जब मैथ्यू मिलर से पाक जर्नलिस्ट ने पूछा कि आप इस आदेश के बारे में क्या सोचते हैं, तो मिलर ने जवाब दिया, “हमने उन खबरों को देखा है, हमने यह भी देखा है कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को उस आदेश पर अंतरिम रोक मुख्य रूप से लगाई है। इसलिए, वे वास्तव में प्रभाव में नहीं हैं। हम हमेशा दुनिया में कहीं भी धर्म और आस्था की आजादी के अधिकार के सम्मान को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए पूर्ण प्रतिबद्ध हैं।
हमने सभी धर्मों को मानने वालो के लिए समान ट्रीटमेंट की जरूरत पर अपने भारतीय काउंटरपार्ट्स के साथ बातचीत की है। मिलर ने जोर देकर कहा कि अमेरिका धर्म और आस्था की आजादी के अधिकार की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले में भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत पूर्ण रूप से जारी रखेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक का भी स्वागत किया और इसे एक सकारात्मक कदम भी बताया।
यूपी सरकार के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में रिट फाइल की गई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए जस्टिस हृषिकेश राय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने कुछ अहम टिप्पणी भी की, जजों ने कहा कि दुकानदारों को मालिक की पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। हां ये जरूर है कि दुकानदारों को यह बताना होगा कि उनके यहां शाकाहारी या मांसाहारी, कौन-सा खाना मिलता है।

