भारतीय शेयर बाजार मची हाहाकार, भारतीय शेयर बाजार ने कई सुनहरे पल देखे हैं, लेकिन इसके इतिहास में कुछ ऐसे काले दिन भी दर्ज हैं, जब सेंसेक्स भारी गिरावट का शिकार हुआ है।
और वैश्विक संकट से लेकर घरेलू अनिश्चितता तक, इन घटनाओं ने निवेशकों को सकते में डाला है। कई बार हालात ऐसे आए हैं कि बाजार में ट्रेंडिंग को कुछ समय के लिए रोकने की नौबत आ गई।
इलेक्शन रिजल्ट डे पर Share Market में कारोबार शुरू होते ही गिरावट का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वो लगातार बढ़ता ही चला गया था।
और बीएसई के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स ने उस दिन 1700 अंक टूटकर ट्रेडिंग शुरू की थी और दोपहर 12.20 बजे तक तो ये 6094 अंक तक फिसलकर 70,374 के लेवल पर आ गया था।
इसके बाद 23 मार्च 2020 – सेंसेक्स में 3,935 अंकों की गिरावट, कोविड-19 महामारी के चलते सेंसेक्स 3,935 अंक टूटा था। और लॉकडाउन की आशंका से बाजार ठप हुआ, और निवेशकों को भारी नुकसान भी झेलना पड़ा।
और फिर 12 मार्च 2020 – सेंसेक्स में 2,919 अंकों की गिरावट: कोरोना के वैश्विक प्रसार और यस बैंक संकट ने सेंसेक्स को 2,919 अंक नीचे खींचा। 10% लोअर सर्किट लगा, ट्रेडिंग रुकी।
साथ ही 9 मार्च 2020 – सेंसेक्स में 1,941 अंकों की गिरावट: तेल की कीमतों में गिरावट और कोविड-19 की चिंता से सेंसेक्स 1,941 अंक लुढ़का। यह महामारी से पहले की बड़ी ही गिरावट थी।
फिर कोविड-19 के बढ़ते मामलों ने बाजार को डराया, सेंसेक्स 1,448 अंक गिरा, जिससे निवेशकों का विश्वास डगमगा गया। 24 फरवरी 2020 – सेंसेक्स 806 अंकों की गिरावट: कोरोना के वैश्विक प्रभाव की शुरुआत में सेंसेक्स 806 अंक नीचे आया।