Manipur में अब नहीं होगी हिंसा, सबसे पुराने अलगाववादी संगठन ने डाले हथियार, किया शांति समझौता

मणिपुर में पिछले 7 महीने से चल रही जातीय हिंसा को खत्म करने में केंद्र सरकार को उम्मीद की किरण नजर आने लगी है।

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न्यूज़लिंक हिंदी। मणिपुर में पिछले 7 महीने से चल रही जातीय हिंसा को खत्म करने में केंद्र सरकार को उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। केंद्र सरकार के साथ बातचीत के कई दौर के बाद मणिपुर के सबसे विद्रोही समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) ने बुधवार को दिल्ली में स्थाई शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही इंफाल घाटी में UNLF कैडर्स ने हथियारों के साथ सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शान सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट लिखकर देश को इस बारे में जानकारी दी।

‘एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “एक ऐतिहासिक मील का पत्थर। पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मोदी सरकार के अथक प्रयासों ने पूर्ति का एक नया अध्याय जोड़ा है क्योंकि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने आज नई दिल्ली में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मणिपुर का सबसे पुराना घाटी स्थित सशस्त्र समूह यूएनएलएफ, हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”

शाह ने आगे कहा कि भारत सरकार और मणिपुर सरकार द्वारा यूएनएलएफ के साथ शांति समझौता छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सर्वसमावेशी विकास के दृष्टिकोण को साकार करने और पूर्वोत्तर भारत में युवाओं को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।”

कौन है UNLF?
इस उग्रवादी संगठन UNLF की स्थापना 24 नवंबर 1964 को हुई थी। इसका अध्यक्ष आरके मेघन उर्फ सना याइमा है, जिसका मकसद मणिपुर को भारत से अलग कर उसे एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में बदलना है। इसके लिए उन्होंने अपना हथियारबंद संगठन बनाया था, जिसमें बड़ी संख्या में युवा पुरुष और महिलाएं जुड़े हुए थे। लेकिन बैक चैनल से की जा रही सरकार की लगातार बातचीत के बाद संगठन ने आखिरकार हथियार डालकर देश की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला कर ही लिया।

नाराज लोगों ने बनाया था संगठन
ब्रिटिश इंडिया के समय में मणिपुर एक रियासत था। जब देश आजाद हुआ तो मणिपुर के महाराजा को कार्यकारी प्रमुख बनाकर यहां पर एक सरकार बनाई गई थी। 1972 में मणिपुर को पूर्ण राज्य का मिला। मणिपुर के पूर्ण राज्य बनने से पहले ही मैतेई समुदाय के ऐसे लोग भारत में विलय से नाराज थे। उन्होंने UNLF का गठन किया था। इसकी संगठन की गतिविधियां बढ़ने पर 1980 में केंद्र ने पूरे मणिपुर को अशांत क्षेत्र लागू कर दिया था और राज्य में चल रहे विद्रोही आंदोलनों को रोकने के लिए आफस्पा एक्ट लगा दिया था। इस सब के बीच 90 के दशक में कुकी समुदाय ने अपना संगठन बना लिया। इसके बाद मणिपुर में जातीय संघर्ष शुरू हो गया।

ये कामयाबी बड़ी है
दो साल पहले 9 मार्च, 2021 को मणिपुर के इंफाल में विभिन्न आतंकी संगठनों ने 20 सदस्यों ने हथियार डाले थे। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में से 16 थडौ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (टीपीएलए) के सदस्य थे। तब यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के दो सदस्य सरेंडर में शामिल हुए थे। UNLF के सरेंडर करने के बाद उम्मीद है कि राज्य के बचे आतंकी संगठन भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है निश्चित तौर पर मणिपुर के नए भाग्य का उदय होगा।

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