धनतेरस पर पूजा के लिए 1 घंटा का यह मुहूर्त सबसे शुभ, जानें पूजन और खरीदारी का शुभ मुहूर्त

धनतेरस का पर्व कार्तिक मास त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान धनवंतरी, माता लक्ष्मी, कुबेर और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। आइए जानते हैं धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

0
189

न्यूज़लिंक हिंदी। देशभर में आज धनतेरस का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। सोना चांदी आभूषण और बर्तन खरीदने के लिए लोग खासा उत्साहित देखे जा रहे हैं, लेकिन इस बार धनतेरस के अवसर पर विशेष प्रकार के आभूषण और सोने चांदी की वस्तु खरीदने को लेकर लोगों में है। मान्यता है कि इस दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। धन और समृद्धि के लिए धनतेरस मंत्र के साथ देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

धनतेरस का पर्व कार्तिक मास त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान धनवंतरी, माता लक्ष्मी, कुबेर और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। आइए जानते हैं धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस का दिन महालक्ष्मी,भगवान गणेश, कुबेर महाराज और भगवान धनवंतरी का पूजन किया जाता है।
त्रयोदशी तिथि का आरंभ 12 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 57 मिनट तक। प्रदोष काल शाम में 5 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 8 मिनट तक। इसके अलावा वृषभ लग्न शाम में 5 बजकर 47 मिनट पर वृषभ लग्न उदित होगा और 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना बेहद शुभ रहेगी क्योंकि, यह स्थिर मुहूर्त है। इसलिए धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में 5 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। वहीं, यम दीप दान का मुहूर्त भी इस समय तक ही है।

धनतेरस पर रखें इन बातों का ख्याल
धनतेरस से पहले ही दिवाली की अच्छे से साफ सफाई कप लें। इस दिन भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर महाराज और भगवान धन्वंतरि की पूजा एक साथ कर लें। साथ ही इस दिन जरुरमंद लोगों को अपने सामर्थ के अनुसार, दान जरूर करें।

धनतेरस पूजा विधि

  • धनतेरस के दिन सुबह स्नान आदि के बाद मंदिर में जाएं और अपने बाएं हाथ में जल भरकर खुद पर और अपने आसपास छिड़के।
  • इसके बाद लाल कपड़ा बिछाएं और कुबेर देव को स्थापित करें। कुबेर देव, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और धनवंतरी भगवान की तस्वीर स्थापित करें।
  • इसके बाद सभी को वस्त्र के रूप में मोली चढ़ाएं। इसके बाद कुबेर देव को अपनी श्रद्धा के अनुसार, चीजें अर्पित करें। आप चाहें का चांदी का सिक्का आदि भी अर्पित कर सकते हैं। आप चांदी के सिक्के के अलावा नारियल भी चढ़ा सकते हैं।
  • इसके बाद लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें और माता लक्ष्मी की आरती उतारें। इसके बाद प्रसाद भगवान को अर्पित करें परिवार के लोगों को बांटें।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here