थायरॉइड प्रेग्नेंसी के लिए बेहद खतरनाक, जानिए एक्सपर्ट की राय

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थायरॉइड एक गंभीर समस्या हैं जो कि ग्रंथि गले में मौजूद एक छोटी सी तितली के आकार की होती है। ये शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर और हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान इसका थायरॉइड का खासतौर पर ध्यान रखने की जरूरत होती है। यह मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों की सेहत को सीधे प्रभावित करता है।

और खासतौर पर पहले तीन महीनों में, जब बच्चा पूरी तरह मां के थायरॉइड हार्मोन पर निर्भर रहता है। अगर गर्भावस्था के दौरान हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म का इलाज नहीं किया गया तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।

एक्सपर्ट कहती हैं किहाइपोथायरॉइडिज्म से गर्भपात, एनीमिया और समय से पहले डिलीवरी का खतरा और भी बढ़ जाता है। ऐसे में महिला को थकान, वजन बढ़ना और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं, हाइपरथायरॉइडिज्म से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट फेलियर और प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। थायरॉइड समस्याओं का गर्भावस्था के दौरान सही इलाज न होने पर मां और बच्चे पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

एक्सपर्ट कहती हैं कि अपनी डाइट में डेयरी प्रोडक्ट, सी फूड, नट्स और जिंक से भरपूर चीजों को भी शामिल करें।

सोयाबीन, गोभी और ब्रोकली को कम से कम खाएं। तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन भी करें। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी भी पिएं।

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपना खास ध्यान रखना चाहिए, नियमित थायरॉइड जांच गर्भावस्था के दौरान जरूरी है, खासतौर पर उन महिलाओं के लिए जिन्हें पहले से थायरॉइड की समस्या रही हो।

हाइपोथायरॉइडिज्म के लिए थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट और हाइपरथायरॉइडिज्म के लिए एंटी-थायरॉइड दवाएं डॉक्टर की देखरेख में जरूर लेनी चाहिए।

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