आज बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र पर्व बुद्ध पूर्णिमा मनाया जायेगा। वैशाख महीने की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा व वेसाक कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया यह भगवान बुद्ध की 2587वीं जयंती होगी। साथ ही मान्यता है कि बुद्ध पूर्णिमा को भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और उनका परिनिर्वाण हुआ था।
भगवान बुद्व का यह पर्व भारत में ही नहीं, थाईलैंड, चीन, कम्बोडिया, नेपाल, श्रीलंका, जापान, तिब्बत जैसे विभिन्न देशों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
ये भी बता दें कि बुद्ध उपदेशो से बौद्ध धर्म का उदय हुआ और भगवन बुद्ध के उपदेशों पर ही आधारित जीवन जीने वाले बौद्ध कहलाये। इसके साथ ही पूर्वी और पश्चिमी एशिया में इसका प्रसार हुआ।
चीन, वियतनाम, कंबोडिया, म्यांमार, और थाईलैंड, जापान जैसे देशो में बौद्ध को पूजा जाता है। और बुद्ध पूर्णिमा को बुद्धा जयंती, पीपल पूर्णिमा और वैशाख पूर्णिमा से नाम से भी जाना जाता है।
और फिर इस दिन बौद्ध मंदिरो में विशेष पूजन का भी आयोजन किया जाता है इस दिन ध्यान, उपदेश और दान पुण्य का भी कार्य किया जाता है साथ ही इस दिन अलग अलग जगहों पर धार्मिक कार्य भी किये जाते हैं
इसके अलावा पूर्णिमा तिथि रविवार शाम 6 बजकर 55 मिनट से हुआ था जो आज सोमवार शाम को 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगी वैशाखी पूर्णिमा के पूजा का मुहूर्त सोमवार दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से लेकर 12 बजकर 45 मिनट तक ही मनाया जायेगा।
साथ ही वैशाख पूर्णिमा को रात में चन्द्रमा को जल चढाने की प्रथा है इसके लिए चंद्रोदय के समय में एक लोटे में जल, दूध औरअक्षत को आसमान में उदित चन्द्रमा की तरफ अर्पित कर दें।
और फिर इस बार वैशाख पूर्णिंमा पर रवि योग बना है वहीं पूरे दिन बुधादित्य और वरियन योग का प्रभाव भी बन रहा है।