न्यूज़लिंक हिंदी। उत्तर प्रदेश बदल रहा है। एक नहीं बल्कि कई तरह से। यह भारत की नई शराब राजधानी है, जहां देश में पोर्टेबल और गैर-पोर्टेबल शराब का सबसे अधिक बनाई और बेची जाती है। UP ने वित्त वर्ष 2023 में 42,250 करोड़ रुपये का उत्पाद शुल्क राजस्व अर्जित किया है, जो 2017-18 में दर्ज 14,000 करोड़ रुपये से तीन गुना अधिक है, जिस वर्ष योगी आदित्यनाथ सत्ता में आए थे। शराब राजस्व के मामले में यूपी कर्नाटक को पछाड़कर नंबर वन बन गया है। लेकिन कर्नाटक की तरह, यूपी में बेंगलुरु नहीं है, जो आईटी हब है और उच्च कमाई वाले युवाओं का घर है, जो नियमित पार्टियों की मेजबानी करते हैं।
कर्नाटक अब दूसरे स्थान पर
आबकारी आयुक्त सेंथिल पांडियन ने कहा,“कर्नाटक अब दूसरे स्थान पर है। हमारी नीति ने उद्योग को एकाधिकार को तोड़ने के लिए लाइसेंस शुल्क-आधारित प्रणाली से उपभोग-आधारित प्रणाली में पूरी तरह से स्थानांतरित कर दिया। हमने दुकानों की संख्या भी प्रति व्यक्ति दो तक सीमित कर दी है। आवंटन पैटर्न को पहले नीलामी-आधारित मॉडल से ई-लॉटरी प्रणाली में बदल दिया गया था। हमने ट्रैक और ट्रेस सिस्टम स्थापित करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है।”
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इन जिलों में बिकी सबसे ज्यादा शराब
विभाग के लिए लखनऊ सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाला रहा है, जबकि नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और बरेली भी आगे रहे हैं। कुशीनगर, शाहजहाँपुर, सोनभद्र,देवरिया,लखीमपुर खीरी,हरदोई और चित्रकूट जैसे छोटे जिलों ने भी उच्च राजस्व की सूचना दी है। अधिकारियों ने कहा कि इस साल छह डिस्टिलरीज स्थापित की गई हैं और सात और इस वित्तीय वर्ष के अंत तक तैयार हो जाएंगी।

