न्यूज़लिंक हिंदी। लखनऊ में गोसाईगंज जिला कारागार में 36 बंदी एचआइवी संक्रमित मिले हैं। इसमें जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। तीन महीने से एचआइवी जांच किट खत्म है। जेल प्रशासन की ओर से नए आने वाले बंदियों की एचआइवी जांच ही नहीं कराई गई। दिसंबर 2023 में मेडिकल कैंप लगाकर एचआइवी जांच में कुल 36 बंदी एचआइवी संक्रमित मिले हैं। जेल प्रशासन ने बंदियों का इलाज और काउंसिलिंग शुरू कर दिया है. संक्रमित कैदियों की खुराक भी बढ़ा दी गई है।
लखनऊ जेल के जेल अधीक्षक आशीष तिवारी ने एबीपी लाइव से बातचीत में बताया कि जो भी कैदी जेल में नए आते हैं उनकी महीनेवार एड्स की जांच कराई जाती है, जिसकी टेस्टिंग किट स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
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उन्होंने बताया था कि अगस्त 2023 के बाद टेस्टिंग किट खत्म हो गई थी जिस कारण सितंबर अक्टूबर और नवंबर में जेल में निरुद्ध में हुए कैदियों की एचआईवी की टेस्टिंग नहीं हो पाई। फिर दिसंबर में पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर कैंप लगाकर सभी जिलों में किट उपलब्ध होने के बाद टेस्टिंग कराई गई जिसमें कि लखनऊ जेल में 36 कैदी एचआईवी पॉजिटिव निकले।
अधिकारी ने बताया कि यह 3 महीने में लखनऊ जेल में भर्ती हुए कैदियों का आंकड़ा है। आशीष तिवारी ने बताया कि इसमें अधिकतर ऐसे कैदी हैं जो नशे के आदि हैं और सिरिंज से ये सभी नशा करते हैं।
संक्रमित बंदियों के आहार बढ़ाएं, काउंसिलिंग भी शुरू
जांच टीम के निर्देशानुसार संक्रमित बंदियों के आहार में बदलाव करने साथ बढ़ाया भी गया है। उन्हें डाक्टर की निगरानी में रखा गया है। सभी का केजीएमयू के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपिया (एआरटी) में इलाज चल रहा है। जेल प्रशासन की ओर से संक्रमित बंदियों की काउंसिलिंग भी शुरू कर दी।

