उत्तर प्रदेश सरकार ने गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को अच्छे प्राइवेट स्कूलों में फ्री शिक्षा का लाभ देने के लिए अब कई नई व्यवस्था लागू की है।
और फिर बेसिक शिक्षा विभाग के अपर ही मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने 8 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश में RTE अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटें आरक्षित करने की प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित भी बनाया है।
और फिर इस आदेश से उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद बच्चे प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन पा सकेंगे।
साथ ही सभी गैर-सहायतित प्राइवेट स्कूलों को अपनी प्रारंभिक कक्षा, कक्षा-1 या पूर्व प्राथमिक की कुल सीटों का कम से कम 25% हिस्सा अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।
फिर इन बच्चों को कक्षा-8 तक पूरी शिक्षा मुफ्त मिलती है जिसमें ट्यूशन फीस, किताबें, यूनिफॉर्म आदि शामिल हैं। और सरकार स्कूलों को फीस भी देती है।
साथ ही प्रति बच्चा अधिकतम ₹450 प्रति माह दिया जाता है, इसके अलावा अभिभावकों को किताब-यूनिफॉर्म आदि के लिए अलग से 5000 रुपये हर साल सीधे बैंक खाते में भी मिलते हैं।
इसके लिए अनुसूचित जाति SC, अनुसूचित जनजाति ST, OBC, दिव्यांग बच्चे, HIV या कैंसर पीड़ित माता-पिता के बच्चे, अनाथ बच्चे आदि शामिल हैं।
अंत्योदय, बीपीएल कार्ड धारक, दिव्यांगता, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन प्राप्त करने वाले अभिभावक, परिवार की वार्षिक आय 1 लाख से कम भी शामिल हैं।
1 अप्रैल 2026 के आधार पर नर्सरी 3-4 साल, LKG 4-5 साल, UKG 5-6 साल, कक्षा-1 6-7 साल तय की गई है।
और फिर बच्चे को उसी ग्राम पंचायत या वार्ड का निवासी होना चाहिए जहां स्कूल स्थित है। और फिर निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के अलावा जाति प्रमाण पत्र व आय प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होगा।
फिर यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन है रखी गई है। इसमें महानिदेशक स्कूल शिक्षा द्वारा समय-सारणी जारी भी की जाएगी।
और फिर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक भी होगी। RTE पोर्टल www.rte25.upsdc.gov.in पर अभिभावक आधार नंबर, बैंक खाता और जरूरी दस्तावेज जैसे जाति,आय,निवास प्रमाणपत्र, आधार अपलोड करना होगा।
और फिर अपने वार्ड या ग्राम पंचायत से अधिकतम 10 स्कूलों को प्राथमिकता भी दें।इसके अलावा पहले खंड शिक्षा अधिकारी, फिर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दस्तावेज पर जांच भी करेंगे।
और फिर प्रक्रिया लॉटरी के द्वारा पूरी की जाएगी। और लॉटरी जिला अधिकारी या फिर सीडीओ की निगरानी में निकाली ही जाएगी।
और फिर जो दो चरणों में होगी। और फिर चयनित बच्चों को एसएमएस के द्वारा सूचना दिया जाएगा।