न्यूज़लिंक हिंदी। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पहुंच चुकी है। आज उनकी यात्रा का यूपी में दूसरा दिन है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 35वें दिन वाराणसी पहुंची है। इसके साथ ही राहुल गांधी ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में चौथी बार हाजिरी लगाई। गोदौलिया से रथयात्रा रूट पर पहली बार कोई कांग्रेस नेता राजनीतिक यात्रा करेगा। पं. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी समेत किसी भी नेता ने बनारस में इस रूट पर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं की है।

इस यात्रा के जरिये कुर्मी मतदाताओं पर नजर
कांग्रेस ने पूर्वांचल में वाराणसी से प्रयागराज के बीच 12 लाख कुर्मी मतदाताओं को साधने के लिए पॉलिटिकल दांव खेला है। इन दो महत्वपूर्ण शहरों के बीच कुल 5 लोकसभा सीटें हैं। जिनमें वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, फूलपुर और प्रयागराज शामिल हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के सहारे इन जिलों के बड़े कुर्मी मतदाताओं को कांग्रेस अपने पाले में खींचना चाहती है। यदि रणनीति सटीक बैठी और जनता ने साथ दिया तो पूर्वांचल में कांग्रेस का सूखा खत्म हो सकता है।
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आज वाराणसी के गौदोलिया से राहुल गांधी के रोड शो में अपना दल (कमेरावादी) नेता और सिराथू विधायक पल्लवी पटेल भी शामिल होंगी। पूर्वांचल में कुर्मी जाति का कोई भी बड़ा नेता कांग्रेस के पास मौजूदा वक्त में नहीं है। ऐसे में कांग्रेस इन जिलों में जातिगत रणनीति फिट करने में जुटी है। दूसरी ओर पल्लवी पटेल की अब सपा से मनमुटाव जगजाहिर हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर राहुल गांधी को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी।

दूसरी ओर स्वामी प्रसाद मौर्य भी कांग्रेस के भारत जोड़ो यात्रा में जुड सकते हैं। ऐसे में मौर्या जाति के बड़े मतदाताओं को भी कांग्रेस भुनाने का दांव खेल रही है। हालांकि स्वामी प्रसाद के विवादित बयानों से हिंदू धर्म का बड़ा धड़ा बेहद नाराज है, ऐसे में कांग्रेस को फायदे के बजाय नुकसान भी हो सकता है।
वाराणसी से कांग्रेस का ऐसा रहा कनेक्शन
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बनारस से गहरा लगाव था। पं. नेहरू ने तो 1910 से 1950 तक बनारस की कई यात्राएं कीं। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका बनारस आना जाना लगा रहता था। वहीं इंदिरा गांधी ने भी बनारस की राजनीतिक और धार्मिक यात्राएं की थीं।
राहुल गांधी के परनाना पं. जवाहर लाल नेहरू पहली बार 1910 में अपने पिता पं. मोतीलाल नेहरू के साथ बनारस आए थे। इसके बाद 1921 में काशी विद्यापीठ के स्थापना समारोह में पहुंचे थे। इसके बाद 1942 और 1946 में वह बनारस पहुंचे थे। आजादी के बाद बतौर प्रधानमंत्री पं. नेहरू 1950 और 1952 में काशी आए थे।
राहुल की दादी व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 1980 के चुनाव की बनारस यात्रा ऐतिहासिक थी। प्रो. सतीश कुमार राय ने बताया कि 31 दिसंबर 1979 की शाम आठ बजे उनकी सभा निर्धारित थी। वह 14 घंटे की देरी से एक जनवरी 1980 को सुबह 10 बजे पहुंचीं। बरसात भरी सर्द बावजूद के बाद भी जनता उनके इंतजार में डटी रही।

