हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित पर अब जवाब देते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि पंचायत चुनाव से पूर्व पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर लिया जाएगा।
साथ ही संबंधित कानून के तहत उक्त आयोग के रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा।
सरकार की ओर से आए उक्त जवाब के आधार पर कोर्ट ने संबंधित याचिका को निस्तारित भी कर दिया।
और फिर यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की याचिका पर पारित किया।
साथ ही याचिका में कहा गया था कि अक्टूबर 2025 में पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल पूरा हो चुका है, जिसे एक वर्ष का कार्यकाल विस्तार भी दिया गया है।
ये भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने जयश्री लक्ष्मण राव पाटील मामले में समर्पित आयोग का गठन कर, उक्त आयोग के सर्वे व रिपोर्ट के आधार पर ही स्थानीय चुनावों में आरक्षण को पूरी तरह से लागू किए जाने का आदेश दिया था।
और फिर दलील दी गई कि अप्रैल व जुलाई 2026 के मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने हैं, बावजूद इसके अब तक एक समर्पित आयोग का गठन नहीं किया जा सका है।
फिर यह भी दलील दी गई कि छह सदस्यीय आयोग के गठन का मामला कैबिनेट के समक्ष विचाराधीन है।
फिर वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने शासन से प्राप्त निर्देशों के आधार पर कोर्ट को बताया कि पंचायत चुनाव से पूर्व पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर लिया जाएगा।