जानिए सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में एजुकेशन लोन के लेकर क्या दिया जवाब। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के एजुकेशन डिपार्टमेंट यानी शिक्षा मंत्रालय को बंद करना चाहते हैं।
और ऐसा अक्सर ऐसा होता है तो सैकड़ों लोगों की नौकरियां जाएंगी। सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात ये है कि उन्होंने शिक्षा मंत्री की नियुक्ति भी कर दी है, जिनका काम अपने ही मंत्रालय को भी बंद करना है।
अमेरिकी शिक्षा मंत्री का जिम्मा लिंडा मैकमैहन संभाल रही हैं। हाल ही में लिंडा सीनेट के सामने भी पेश हुईं, जहां उनसे शिक्षा मंत्रालय को बंद करने से जुड़े हुए कठिन सवाल भी पूछे गए।
और उन्होंने सांसदों को आश्वस्त किया कि कम आय वाले स्कूल जिलों के लिए टाइटल I फंडिंग कांग्रेस के विनियोग के माध्यम से जारी रहेगी।
मगर उन्होंने इस बारे में स्पष्ट रूप से जवाब भी नहीं दिया कि क्या ‘इंडिविजुअल विद डिसएबिलिटी एजुकेशन एक्ट’ जैसे प्रोग्राम को अलग-अलग एजेंसियों में ट्रांसफर किया जा सकता है या नहीं।
इसके साथ ही उन्होंने शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए भी पेल ग्रांट को देने की वकालत की। अभी चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट कोर्स की पढ़ाई के लिए पेल ग्रांट दिया जाता है।
फेडरल पेल ग्रांट के जरिए यूजी के छात्र अपने कॉलेज की पढ़ाई का पैसा भी दे पाते हैं। ग्रांट के माध्यम से उन छात्रों को पढ़ने के लिए पैसा मिलता है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत भी होती है।
हालांकि, अभी सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर शिक्षा मंत्रालय को बंद किया जाएगा, तो क्या जिन छात्रों ने एजुकेशन लोन लिया था, वो माफ हो जाएगा।
वैसे तो सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई बयान भी नहीं आया है, लेकिन मंत्रालय के बंद होने के बाद एजुकेशन लोन के माफ होने की संभावना भी नहीं है।
फेडरल स्टूडेंट लोन इसे लेने वाले यानी उधारकर्ता और देने वाले यानी सरकार के बीच कानूनी रूप से बाध्यकारी वित्तीय समझौता होता है। ये वचन पत्रों द्वारा शासित भी मुख्य रूप से होता है।