पुराना कुछ नहीं पूछिएगा, वो सब अतीत था, जिसे मैंने खत्म कर दिया, 80 करोड़ की प्रॉपर्टी के मालिक श्रीनाथ खंडेलवाल का वृद्धाश्रम में निधन

वाराणसी के साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का निधन शनिवार को सुबह 9 बजे वाराणसी के 'दीर्घायु अस्पताल' में हो गया।

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वाराणसी के साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का निधन शनिवार को सुबह 9 बजे वाराणसी के ‘दीर्घायु अस्पताल’ में हो गया। खंडेलवाल काशी कुष्ठ सेवा संघ वृद्धाश्रम में 17 मार्च, 2024 से रह रहे थे। उनके बच्चों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। अंतिम संस्कार में भी कोई नहीं पहुंचा। जानकारी के अनुसार खंडेलवाल के पास 80 करोड़ की प्रॉपर्टी थी। उन्होंने 400 किताबें लिखीं। अपने आखिरी वक्त उन्होंने भाष्कर एप को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ”पुराना कुछ नहीं पूछिएगा। वो सब अतीत था, जिसे मैंने खत्म कर दिया। अब नया खंडेलवाल है, जो सिर्फ किताबें लिख रहा है। जब तक सांस है, कलम चलती रहेगी।”

काशी में जन्में खंडेलवाल की उम्र 80 साल थी। गुलाम भारत में पैदा हुए खंडेलवाल ने 15 साल की उम्र में कलम पकड़ ली। वह 10वीं फेल थे। ज्यादातर किताबें, अन्य किताबों और पुराणों का ट्रांसलेशन है। इसमें मुझे महारथ है। अभी तक 400 किताबें लिख चुके हैं। जिनमें कई पुराण भी हैं। शिव पुराण के 5 वॉल्यूम हैं, जो ऑनलाइन हैं। उसकी कीमत 6 हजार से ज्यादा है।

एक इंटरव्‍यू में खंडेलवाल ने कहा था कितनी किताबें लिखी हैं, कौन-कौन सी बताऊं। मत्स्य पुराण लिखी है, जो 3000 पन्नों की है। इसके अलावा शिव पुराण, पद्म पुराण लिखा। हिंदी, संस्कृत के अलावा असमी और बांग्ला में भी लिखा। अभी नरसिंह पुराण का अनुवाद हिंदी में कर रहा हूं। जल्द ही वह भी छप जाएगी। यह इच्छा उनकी अधूरी रह गयी।

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