न्यूज़लिंक हिंदी। लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हिंदू हिंसा और अभय मुद्रा वाले बयान पर जमकर हंगामा हो गया। राहुल ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान भगवान शंकर की तस्वीर दिखाई और कहा कि यह अभय रहने का हमे मुख्य संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि शिव की तस्वीर में त्रिशूल बाएं हाथ में होता है, यह दरअसल अहिंसा का प्रतीक है। शिव की तस्वीर में कांग्रेस का चुनाव चिह्न ‘अभय मुद्रा’ भी है, जो अभय रहने की बात करता है. यहां तक तो ठीक था लेकिन इसके बाद राहुल ने वह कह दिया जिस पर जमकर हंगामा हो गया।
राहुल गांधी इसके बाद अपने साथ लाई गई गुरुनानक देव, भगवान महावीर और जीजस क्राइस्ट की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि सभी में अभय मुद्रा है, जो न डरने की सीख देती हैं। उन्होंने कि इस्लाम में भी दोनों हाथों से नमाज पढ़ना भी एक तरह से ‘अभय मुद्रा’ का ही मुख्य रूप है। राहुल ने कहा कि एक तरफ शिव ‘डरो मत, डराओ मत’ और अहिंसा की बात करते हैं, वहीं जो लोग अपने आप को हिंदू कहते हैं, वह हिंसा हिंसा हिंसा की बात करते हैं।
राहुल के यह बोलते ही सदन में जमकर हंगामा शुरू हो गया। बीजेपी समेत तमाम सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस पर पूर्ण आपत्ति जताई। इतना ही नहीं, सदन में मौजूद पीएम नरेंद्र मोदी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा कि पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना यह एक गंभीर विषय है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण के शुरुआत में बीजेपी और पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला। राहुल ने जैसे ही बोलना शुरू किया, वैसे ही सदन में भारत माता की जय और मोदी-मोदी के नारे लगने शुरू हो गए। इसके बाद राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए कहा- जय संविधान , और कहा कि हमने देश के लोगों के साथ मिलकर इसकी रक्षा की है।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया, पिछले कुछ समय से संविधान पर योजनाबद्ध तरीके से हमले हो रहे हैं। हम में से कई पर पर्सनली अटैक भी हुआ है। हम में से कई नेता जेल में हैं। मेरे ऊपर भी हमला हुआ है। 20 से ज्यादा केस, 2 साल की जेल, मुझे घर से बाहर कर दिया गया। फिर लगातार मुझ पर मीडिया के द्वारा भी हमले होते रहे। इसके बाद हुई 55 घंटों की ईडी की पूछताछ को मैंने काफी एंज्वॉय भी किया।
राहुल गांधी ने लोकसभा में अपनी स्पीच के दौरान भगवान शंकर की तस्वीर को भी लहराई। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने उनको टोकते हुए नियम पुस्तिका निकाल ली और कहा, क्या सदन में हम शिवजी की तस्वीर भी नहीं दिखा सकते, मेरे पास और भी तस्वीरें थीं, जिन्हें में दिखाना चाहता था। इसके बाद उन्होंने कई भगवानों की तस्वीरें भी दिखाईं।
राहुल गांधी ने कहा कि वह भगवान शिव से प्रेरणा लेते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष में कहा, भगवान शिव से मुझे विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष की प्रेरणा मिली। शिव के गले में सांप है, जो विपत्तियों के सामने डटे रहने की प्रेरणा देता है। शिव के बाएं हाथ में त्रिशूल अहिंसा का प्रतीक है। अगर उनके दाएं हाथ में त्रिशूल होता, तो वह वार करने की स्थिति में होते, लेकिन ऐसा नहीं है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, अभय मुद्रा कांग्रेस का प्रतीक है,अभयमुद्रा निर्भयता का संकेत है, आश्वासन और सुरक्षा का संकेत है, जो भय को दूर करता है और हिंदू, इस्लाम, सिख धर्म, बौद्ध धर्म और अन्य भारतीय धर्मों में दैवीय सुरक्षा और आनंद प्रदान करता है।हमारे सभी महापुरुषों ने अहिंसा और भय ख़त्म करने की मुख्य बात की है,लेकिन, जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं वे केवल हिंसा, नफरत, असत्य की बात ही करते हैं।
सशस्त्र बलों में प्रवेश के लिए अग्निवीर योजना पर बोलते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, एक अग्निवीर ने बारूदी सुरंग विस्फोट में अपनी जान गंवा दी, लेकिन उसे ‘शहीद’ नहीं कहा जाता, ‘अग्निवीर’ इस्तेमाल करो और फेंक दो’ वाला मजदूर है। इस अग्निवीर को कुछ नहीं मिलता।
हालांकि, इस पर आपत्ति जताते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि अग्निवीर यदि युद्ध के दौरान मारे जाते हैं, तो उन्हें एक करोड़ रुपये संयुक्त रूप से दिये जाते हैं। राहुल गांधी को शायद इस बात की जानकारी नहीं है।

