पाक के लोगों ने बांग्लादेशी मुस्लिमों को कभी भी असली मुसलमान क्यों नहीं माना

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इस्लामी भाई-चारा के नाम पर इन दिनों बांग्लादेश मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में पाकिस्तान से गलबहियां की कोशिशों में लगातार लगा हुआ है।

लेकिन पाकिस्तान के एक रहते पश्चिमी पाकिस्तान के मुसलमानों ने पूर्वी पाकिस्तान के मुसलमानों को कभी असली मुसलमान नहीं माना।

और उन्हें कन्वर्टेड बताते हुए दोयम दर्जे का मुसलमान भी बताया जाता था। और उनके लिए सिर्फ हिकारत थी।

और उन्हें एहसानफरामोश और नाशुक्रे के ताने मिलते थे। और पश्चिमी पाकिस्तानी मुसलमान कहते थे कि इनके लिए चाहें जो भी कर दो लेकिन जवाब में इन्हें सिर्फ शिकायतें ही करनी हैं।

साथ ही अगस्त 2024 में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ होने के बाद से मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त है।

और पाकिस्तान और चीन जैसे घोषित शत्रुओं के नजदीक पहुंचने के लिए मोहम्मद यूनुस भारत के पूर्वोत्तर के सात अहम राज्यों के विषय में भी अनर्गल बयानबाजी भी कर रहे हैं।

और असलियत में यूनुस भारत को नीचा दिखाने के लिए चीन-पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश के गठजोड़ की कोशिशों में लगे हुए हैं।

और उन्हें इस बात से फर्क नहीं है कि पाकिस्तान ने वजूद में आने के बाद पूर्वी पाकिस्तान का लगातार दोहन और शोषण भी किया गया था।

और भारत के अंध विरोध में सक्रिय यूनुस बांग्ला देश के उदय के पूर्व पूर्वी पाकिस्तान में पश्चिमी पाकिस्तान के फौजियों और आतंकियों द्वारा किए गए व्यापक नरसंहार, महिलाओं पर अकथनीय अत्याचार और लूट-खसोट जैसे तमाम शर्मनाक और अक्षम्य पाप भी भूल चुके हैं।

और वे यह भी याद नहीं करना चाहते कि मुसलमान होने के बाद भी पश्चिमी पाकिस्तान के मुसलमानों की निगाह में वे पिछड़े और निचले दर्जे के हैं तथा सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर बड़े अलगाव के कारण बराबरी के हकदार भी नहीं हैं।

और असलियत में जिन्ना की जिंदगी में ही उर्दू को पूरे पाकिस्तान की भाषा बनाए जाने के फैसले ने पूर्वी पाकिस्तान के मुसलमानों को ख़फ़ा भी कर दिया था।

बांग्लादेश तो 1971 में वजूद में भी आया। लेकिन उसके पहले ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे मोहम्मद अयूब (1958-1969) ने कहा था, ” अगर मेरा बस चलता तो 1962 में नया संविधान लागू होते ही मैंने पूर्वी बंगाल से कह दिया होता कि अगर चाहें तो हमसे अलग हो सकते हैं, क्योंकि उनकी इच्छा के खिलाफ साथ रखने का कोई भी मतलब नहीं था।

साथ ही फिलवक्त तो वे पाकिस्तान और चीन के साथ पींगे बढ़ा रहे हैं। और इस्लाम के नाम पर उन्हें पाकिस्तान के पाले में खड़ा होना जरूरी लगने लगा है।

लेकिन पंजाबी मुसलमान इन बंगाली मुसलमानों को कैसा मुसलमान मानते हैं, इसे नैयर ने पाकिस्तान की अपनी अनेक यात्राओं के अनुभव के जरिए इन शब्दों में व्यक्त भी किया।

साथ ही “बंगाली मुसलमान बंगाली हिंदुओं से ज्यादा पश्चिमी पाकिस्तानी मुसलमानों को नापसंद करते थे। और ऐसी ही सोच पश्चिमी पाकिस्तानी मुसलमानों की बंगाली मुसलमानों को लेकर भी है।

और वे तो इन बंगाली मुसलमानों को असली मुसलमान मानते ही नहीं हैं वहां यह आमतौर पर सुनने को मिलता – वे असली मुसलमान भी नहीं हैं। वे सिर्फ कन्वर्ट हैं। “

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