दिल्ली में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं, डराने वाले हैं NCRB के आंकड़े; हर रोज रेप के 3 मामले होते हैं दर्ज

हाल ही में जारी हुई एनसीआरबी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले साल की तुलना में साल 2022 में 19 महानगरों में 12.3 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी।

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न्यूज़लिंक हिंदी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल ही में जारी हुई एनसीआरबी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले साल की तुलना में साल 2022 में 19 महानगरों में 12.3 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी।

रिश्तेदारों की क्रूरता के 4847 मामले आये सामने
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के अपहरण की 3,909 घटनाएं दर्ज की गईं। शहर में दहेज हत्या से संबंधित कुल 129 मामले दर्ज किए गए। दिल्ली में पतियों या उनके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता की 4,847 घटनाएं दर्ज की गईं। एनसीआरबी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली महिलाओं के लिए देश का सबसे असुरक्षित महानगर है, जहां प्रतिदिन औसतन तीन बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं।

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दर्ज किए गए 14 हजार से अधिक मामले
राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो के अनुसार, 20 लाख से अधिक आबादी वाले 19 महानगरों (अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, कोयंबटूर, दिल्ली, गाजियाबाद, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कानपुर, कोच्चि, कोलकाता, कोझिकोड, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पटना, पुणे और सूरत) में 2022 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 48,755 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 (43,414 मामले) की तुलना में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 72.4 प्रतिशत की चार्जशीट दर के साथ महिलाओं के खिलाफ अपराध के 14,158 मामले दर्ज किए गए।

बच्चों के खिलाफ भी बढ़े मामले
वहीं, एनसीआरबी की इस रिपोर्ट में बच्चों के साथ होने वाले अपराध को लेकर भी चिंता जताई है। साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रति लाख बच्चों की आबादी पर दर्ज अपराध दर 36.6 थी जो 2021 की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक थी। रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में इसकी संख्या 33.6 प्रतिशत थी।

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ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार बलात्कार और हमले की अधिकांश घटनाओं में पीड़िता और आरोपी आम तौर पर एक-दूसरे को जानते हैं। पुलिस के लिए ऐसी घटनाओं को होने से सीधे रोकना मुश्किल होता है, क्योंकि पीड़िता शिकायत दर्ज करने से बचती हैं।

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