कानपुर। 80 फीसदी पुरुषों को 50 वर्ष की आयु के बाद प्रॉस्टेट ग्रन्थि के बढ़ने की समस्या हो जाती है। इससे पेशाब का रुक-रुककर होना, बार-बार होना या पेशाब का अचानक रुक जाना, छूट जाना तकलीफें हो सकती है। यदि हम सही समय पर उपचार करायें तो मरीज को प्रॉस्टेट के द्वारा होने वाली जटिलताओं मूत्र संक्रमण होना, गुर्दे फेल होना, प्रॉस्टेट कैंसर से बचाया जा सकता है। यह जानकारी वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. वीके मिश्रा ने दी।
80 फीट रोड स्थित बीआर सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में निशुल्क प्रॉस्टेट शिविर में उन्होंने बताया कि प्रॉस्टेट (पौरुष) ग्रन्थि पुरुषों में प्रजनन तंत्र का अहम भाग होता है। यह ग्रन्थि पेशाब की थैली के नीचे और पेशाब नली के चारों ओर से घेरे होती है। आयु के साथ प्रॉस्टेट बढ़ती है और मूत्र मार्ग में रुकावट पैदा करने लगती है जिससे समस्याएं पैदा होने लगती हैं।
उन्होंने बताया कि यदि पीड़ित प्रारम्भिक अवस्था में विशेषज्ञ (यूरोलॉजिस्ट) से परामर्श कर लेता है तो कुछ विशिष्ट दवाइयों के द्वारा इसका निदान सम्भव है। यदि आपरेशन की आवश्यकता होती है तो दूरबीन विधि द्वारा टीयूआरपी विधि से यह आपरेशन होता है। डॉ. वीके मिश्रा ने बताया कि शाकाहार, संयमित भोजन एवं नियमित दिनचर्या और व्यायाम प्रॉस्टेट ग्रन्थि को बढ़ने से रोकते है। पाश्चात्य शैली, फास्ट फूड, कॉफी, मांसाहार इसके बढ़ने में सहायक होते हैं। प्रॉस्टेट कैंसर से बचाव में हरी चाय, टमाटर, सोयाबीन लाभप्रद है।