गर्मी से राहत का प्रमुख जरिया है एयर कंडीशनर यानी एसी। लेकिन यह लोगों को टेंशन भी देता है। टेंशन यानि बिजली बिल की।
अक्सर लोगों को यह शिकायत करते हुए देखा जाता है कि उन्होंने 5 स्टार रेटिंग एसी लिया है, फिर भी बिजली बिल अधिक आ जाता है।
हालांकि कई बार दिक्कत एसी की नहीं, हमारी लापरवाही की होती है। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कुछ बातों का खयाल रखा जाए तो लंबे टाइम तक एसी चलाने के बाद भी ज्यादा बिजली खपत से बचा जा सकता है।
एक्सपर्ट ने बताया कि लोगों को अपने एसी की नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा एसी के एयर फिल्टर्स को नियम रूप से साफ करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उन्हें बदला भी जा सकता है।
फिल्टर साफ रहेंगे तो हवा का फ्लो अच्छा आएगा और कमरा जल्दी ठंडा होगा। इससे बिजली की खपत घटेगी। इसके साथ ही लोगों को अपनी एसी की रेगुलर सर्विस भी करानी चाहिए।
बहुत से लोग कमरा जल्दी ठंडा करने के लिए एसी के टेंपरेचर को एकदम 18 या 16 डिग्री पर ले आते हैं, जोकि गलत है। एक्सपर्ट ने बताया कि बिजली की खपत को कम रखने के लिए एसी का तापमान 22 से 26 डिग्री के बीच सेट किया जा सकता है।
टाइमर सेट किया जा सकता है, जिससे एक निश्चित समय के बाद एसी अपने आप बंद हो जाएगा और पंखे की हवा ही पर्याप्त लगेगी।
साथ ही एसी में कई मोड हाेते हैं, लेकिन आमतौर पर लोग इन मोड्स का इस्तेमाल नहीं करते। एक्सपर्ट का कहना है कि इन मोड्स का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे बिजली खपत को कम रखने में मदद मिल सकती है।
उदाहरण के लिए मॉनसून का मौसम आने से पहले एसी को कूल मोड में चलाना चाहिए और बरसात के मौसम में उसे ड्राई मोड में चलाया जाना चाहिए।
और एक्सपर्ट ने बताया कि इन्वर्टर एसी का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद है। ये एसी स्पीड को रूप के टेंपरेचर के हिसाब से एडजस्ट करते हुए कूलिंग देते हैं।
वहीं नॉन इन्वर्टर एसी की स्पीड आमतौर पर फिक्स्ड होती है, उसमें ज्यादा पावर यूज होती है क्योंकि एसी जब तक रूम ठंडा नहीं करता, वह फुल पावर पर चलता रहता है। और साथ ही एक्सपर्ट का कहना है कि जिन यूजर्स के एसी पुराने हो गए हैं, उन्हें इन्वर्टर एसी में स्विच हो जाना चाहिए।