दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी की बढ़ीं मुश्किलें, CM केजरीवाल ने LG को भेजी रिपोर्ट, सस्पेंड करने की सिफारिश

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने द्वारका एक्सप्रेसवे परियोजना में मुख्य सचिव नरेश कुमार के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में सतर्कता मंत्री आतिशी की रिपोर्ट बुधवार को उपराज्यपाल (एल-जी) वी.के. सक्सेना को भेज दी।

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न्यूज़लिंक हिंदी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने द्वारका एक्सप्रेसवे परियोजना में मुख्य सचिव नरेश कुमार के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में सतर्कता मंत्री आतिशी की रिपोर्ट बुधवार को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना को भेज दी। खबरों के मुताबिक केजरीवाल ने उन्हें तत्काल निलंबन के साथ पद से हटाने की सिफारिश की है, साथ ही आतिशी को केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय को रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

विजिलेंस मंत्री आतिशी की रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि मुख्य सचिव और डिविजनल कमिश्नर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही इस रिपोर्ट को सीबीआई को भेजा जाए, ताकि वो मामले की जांच कर सके। ED को भी मामले की जांच के लिए कहा जाए। जांच लंबित रहने तक नरेश कुमार और अश्विनी कुमार को सर्विस रूल के तहत निलंबित किया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य सचिव और जमीन मालिकों के ऐसे संबंध हैं, जिनको खारिज नहीं किया जा सकता।

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मुख्य सचिव का बेटा करण चौहान अनंत राज ग्रुप के सरीन के व्यवसाय से जुड़ा है। जो जमीन मालिकों का दामाद है। कहा गया कि यहां तक भी लगता है कि मुख्य सचिव के बेटे करण चौहान के अपने व्यवसाय को भी सरीन ने सपोर्ट और प्रमोट किया। इन लिंक की ओर जांच जरूरी है। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि पहली नजर में मुख्य सचिव की तत्कालीन डीएम हेमंत कुमार और जमीन मालिकों के साथ मिलीभगत दिखती है। लेकिन विजिलेंस इन्क्वायरी केवल तत्कालीन डीएम हेमंत कुमार के खिलाफ हुई, जिनका पहले ट्रांसफर और फिर उन्हें निलंबित किया गया।

मुख्यमंत्री को मिली शिकायत में मुख्य सचिव नरेश कुमार और डिविजनल कमिश्नर अश्विनी कुमार के शामिल होने की बात है, जबकि विजिलेंस रिपोर्ट में तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया गया। कथुरिया बंधुओं को 897 करोड़ के विंडफॉल गेन होने का अनुमान है, जबकि विजिलेंस की रिपोर्ट में लगभग 353 करोड़ रुपये का अनुमान था। मुख्य सचिव की भूमिका इसमें संदिग्ध है। 2018 में जमीन के मुआवजा की कीमत तय हुई थी। फरवरी 2019 से लेकर जून 2022 के बीच तीन अलग-अलग डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने उसको नहीं बदला।

नरेश कुमार के दिल्ली के मुख्य सचिव बनने के 40 दिन के भीतर हेमंत कुमार को दक्षिण पश्चिम जिला का डीएम बनाया गया। हेमंत कुमार ने दक्षिण पश्चिम जिले का डीएम बनने के 1 साल के भीतर 2018 का मुआवजा 22 गुना बढ़ा दिया। हेमंत कुमार के खिलाफ विजिलेंस इंक्वारी चीफ सेक्रेटरी या डिविजनल कमिश्नर ने खुद संज्ञान लेकर नहीं करवाई, बल्कि जब इस मुद्दे को NHAI ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में उठाया, तो डिविजनल कमिश्नर और मुख्य सचिव के पास जांच के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

मंत्री ने इस रिपोर्ट को सीबीआइ के पास भेजने की भी सिफारिश की है, ताकि एजेंसी को इस रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बारे में पूरी जानकारी दी जा सके और मुख्य सचिव, मंडलायुक्त की डीएम हेमंत कुमार व भू-स्वामियों के साथ मिलीभगत की जांच तक इसका दायरा बढ़ाया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय को 2015 में भूस्वामियों द्वारा भूमि की खरीद से लेकर 2023 में इसको पाने के लिए अवैध मुआवजे तक के लेन-देन की कड़ी में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपराध होने की संभावना को बताते हुए एक सूचना जारी करना चाहिए।

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जानें क्या है पूरा मामला?
ये मामला दिल्ली के दक्षिण पश्चिम जिले में द्वारका के बामनोली गांव में 19 एकड़ ज़मीन के अधिग्रहण का है, जो द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की गई. साल 2018 में इस जमीन के लिए मुआवजे की रकम करीब 42 करोड़ रुपये तय की गई, लेकिन 2023 में दिल्ली के दक्षिण पश्चिम जिले के डीएम हेमंत कुमार ने इसे कई गुना बढ़ाकर 353 करोड़ कर दिया। इस मामले में मुख्य सचिव पर आरोप इसलिए लग रहे हैं, क्योंकि जिन जमीन मालिकों को इस जमीन अधिग्रहण में बढ़े हुए मुआवजे से फायदा होना था, उनके दामाद की कंपनी में मुख्य सचिव नरेश कुमार का बेटा करण चौहान काम करता है।

मुख्य सचिव नरेश कुमार की तरफ से सोमवार को डिविजनल कमिश्नर अश्विनी कुमार बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करने आए तो उन्होंने मुख्य सचिव पर लग रहे सभी आरोपी को खारिज किया और कहा कि मुख्य सचिव ने खुद इस मामले में तत्कालीन डीएम हेमंत कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करवाई। हालांकि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अश्वनी कुमार ने मुख्य सचिव के बेटे और जमीन मालिकों के संबंध को लेकर कहा कि कोई भी व्यक्ति कहीं पर भी काम कर सकता है।

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