न्यूज़लिंक हिंदी। UP में हलाल सर्टिफिकेशन से जुड़े उत्पादों की बिक्री पर बैन लग सकता है। कुछ कंपनियों ने हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर धंधा चला रखा था। डेयरी, कपड़ा, चीनी, नमकीन, मसाले, और साबुन को भी हलाल सर्टिफाइड कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने संज्ञान लिया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हलाल मामले में भारी भरकम धाराओं और आरोपों में FIR दर्ज की गई है। हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर योगी सरकार सख्त हो गई है। कई कंपनियों और संस्थाओं के खिलाफ हजरतगंज में मुकदमा दर्ज कराया है। शैलेंद्र शर्मा की शिकायत पर हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज हुआ। हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई,जमीयत उलेमा हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली,हलाला काउंसिल आफ इंडिया मुंबई , जमीयत उलेमा महाराष्ट्र मुंबई और हलाल सर्टिफिकेशन देकर सामान बेचने वाली अज्ञात कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।
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हाल ही में, हलाल-प्रमाणित चाय को लेकर एक यात्री और भारतीय रेलवे अधिकारी के बीच तीखी बहस का एक वीडियो वायरल हुआ था। इससे हलाल सर्टिफिकेशन की जरूरत और समझ के बारे में बहस छिड़ गई है। वीडियो में, यात्री सावन के महीने के दौरान हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, रेलवे कर्मचारी ने स्पष्ट किया था कि प्रोडक्ट शाकाहारी ही थी। विवाद इस बात को लेकर था कि पैकेट पर हलाल लिखा था।
@AshwiniVaishnaw @RailMinIndia @IRCTCofficial why Halal certified products are being served to Hindus? Please stop this.. @narendramodi @AmitShah @PMOIndia @HMOIndia pic.twitter.com/qlp0JV5Z4c
— Poonam (@poonam_thukral) July 19, 2023
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UP पुलिस ने दर्ज की FIR
दरअसल, हलाल सर्टिफिकेशन देकर उत्पाद बेचने वाली कंपनियों पर हजरतगंज थाने में FIR दर्ज हुई है। शैलेंद्र शर्मा की शिकायत पर जमीयत उलेमा हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली, हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई, हलाला काउंसिल आफ इंडिया मुंबई और जमीयत उलेमा महाराष्ट्र मुंबई हलाल सर्टिफिकेशन देकर सामान बेचने वाली अज्ञात कंपनियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120b, 153a, 298, 384, 420, 467, 468, 471, 505 में मुकदमा दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक, इंडिया में कोई सरकारी इदारा ऐसा किसी तरह का सर्टिफिकेट जारी नहीं करती है।
हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट पर बैन लगाने का क्या मतलब?
उत्तर प्रदेश में फाइव स्टार होटल तक हलाल सर्टिफिकेट हासिल करते हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि जो मांस परोसा जा रहा है वो हलाल है। मैकडोनाल्ड डोमिनोज़, जोमाटो जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां तक इसी सर्टिफिकेट के साथ काम करती हैं लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे देश में यह सर्टिफिकेट सरकार द्वारा नहीं दिया जाता। दरसअल भारत में अलग-अलग वस्तुओं के लिए अलग-अलग सर्टिफिकेट का प्रावधान है जो उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
जैसे औद्योगिक वस्तुओं के लिए ISI मार्क, कृषि उत्पादों के लिए एगमार्क, प्रॉसेस्ड फल उत्पाद जैसे जैम, अचार के लिए एफपीओ, सोने के लिए हॉलमार्क शामिल है। हलाल का सर्टिफिकेट भारत सरकार नहीं देती है। भारत में यह सर्टिफिकेट कुछ प्राइवेट संस्थान जैसे हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हलाल सर्टिफिकेशन सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द हलाल ट्रस्ट दे रहे हैं। इन पर लगाम कसने की तैयारी है।
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क्या है हलाल?
हलाल सर्टिफिकेशन फूड, कॉस्मेटिक और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों के लिए किया जाता है और यह एक तरह की गारंटी है कि प्रोडक्ट उत्पाद इस्लामी कानून के नियमों के तहत बनाए गए हैं। इसका इस्तेमाल कस्टमर्स को यह बताने के लिए किया जाता है कि इसमें कोई भी “निषिद्ध” पदार्थ शामिल नहीं है, और प्रोडक्ट्स में किसी भी तरह से “अशुद्ध” माने जाने वाले किसी भी पदार्थ या वस्तु का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
हलाल सर्टिफिकेशन फूड, कॉस्मेटिक और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों के लिए किया जाता है और यह एक तरह की गारंटी है कि प्रोडक्ट उत्पाद इस्लामी कानून के नियमों के तहत बनाए गए हैं। इसका इस्तेमाल कस्टमर्स को यह बताने के लिए किया जाता है कि इसमें कोई भी “निषिद्ध” पदार्थ शामिल नहीं है, और प्रोडक्ट्स में किसी भी तरह से “अशुद्ध” माने जाने वाले किसी भी पदार्थ या वस्तु का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

